उत्तर प्रदेश की ग्रामीण सहकारी व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की लंबित वेतन समस्या अब आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। ग्राम-स्तरीय सहकारी ऋण समितियों में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपनी आर्थिक परेशानियों और वेतन भुगतान की मांग को लेकर जनप्रतिनिधि के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
अंबेडकरनगर में साधन समिति सचिव परिषद उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों और बी-पैक्स कर्मचारियों ने विधान परिषद सदस्य हरिओम पांडेय को ज्ञापन सौंपकर लंबित वेतन भुगतान का मुद्दा उठाया। कर्मचारियों ने प्रदेश की सभी बी-पैक्स समितियों में कार्यरत कर्मियों को राजकीय सहायता से वेतन उपलब्ध कराने की मांग की। ज्ञापन परिषद के अध्यक्ष वशिष्ठ कुमार शुक्ल और संरक्षक राकेश मिश्रा के नेतृत्व में सौंपा गया। इसमें कर्मचारियों ने अपनी सेवा संबंधी समस्याओं के साथ वेतन भुगतान की व्यवस्था में बदलाव की मांग रखी।
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कर्मचारियों ने कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और सहकारिता विभाग की योजनाओं तथा कार्यक्रमों को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बी-पैक्स समितियों में विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी मांगों को ज्ञापन में शामिल किया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- कैडर सचिव
- नॉन-कैडर सचिव
- प्रभारी सचिव
- आंकिक
- लिपिक
- विक्रेता
- सहयोगी कर्मचारी
- चौकीदार
कर्मचारियों के अनुसार ये सभी ग्रामीण स्तर पर सहकारी गतिविधियों और विभागीय कार्यक्रमों के संचालन में योगदान देते हैं।
कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि उत्तर प्रदेश की सभी बी-पैक्स समितियों में कार्यरत कर्मचारियों को राजकोषीय सहायता से वर्तमान में लागू वेतनमान के अनुसार वेतन दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने अन्य विभागों के कर्मचारियों की तरह सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन भुगतान की नियमित व्यवस्था नहीं होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग की है, जिससे कर्मचारियों को निर्धारित वेतन और अन्य सुविधाएं मिल सकें।
ज्ञापन में कर्मचारियों ने वेतन भुगतान में देरी से उत्पन्न पारिवारिक समस्याओं का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार समय पर वेतन नहीं मिलने से परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। बच्चों की शिक्षा, शादी-विवाह और रोजमर्रा की आवश्यकताओं पर होने वाले खर्चों का प्रबंधन भी कठिन हो रहा है। कर्मचारियों ने यह भी दावा किया कि कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनका वेतन भी लंबित है। इस समस्या को उठाते हुए कर्मचारियों ने लंबित भुगतान के निस्तारण और भविष्य में नियमित वेतन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
ज्ञापन में कर्मचारियों ने आंदोलन का विस्तृत कार्यक्रम भी बताया है। मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में 7 अक्टूबर को लखनऊ में प्रदेशभर के बी-पैक्स कर्मचारियों को एकत्र करने की घोषणा की गई है। इसके तहत आयुक्त एवं निबंधक कार्यालय, लखनऊ में 'लखनऊ चलो' कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही गई है। कर्मचारियों के घोषित आंदोलन कार्यक्रम के अनुसार:
22 सितंबर से 5 अक्टूबर: कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे।
7 अक्टूबर: प्रदेशभर के बी-पैक्स कर्मचारी लखनऊ स्थित आयुक्त एवं निबंधक कार्यालय में महाजुटान करेंगे।
इसके बाद: मांगों का समाधान नहीं होने पर प्रत्येक पखवाड़े लखनऊ में क्रमिक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही गई है।
यह कार्यक्रम कर्मचारियों की ओर से ज्ञापन में प्रस्तुत आंदोलन की रूपरेखा का हिस्सा है।
कर्मचारियों ने आगे की कार्रवाई को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। ज्ञापन के अनुसार, 1 नवंबर से 5 नवंबर तक समिति के कार्यों से विरत रहने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर पूर्ण हड़ताल, तालाबंदी और सामूहिक त्यागपत्र जैसे कदम उठाने की बात कही गई है। जिला मीडिया प्रभारी नीरज त्रिपाठी ने कहा कि इन परिस्थितियों के लिए विभाग और सरकार जिम्मेदार होंगे। कर्मचारियों ने अपने आंदोलन के माध्यम से वेतन भुगतान, राजकीय सहायता और
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