UP News: देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर जमकर हमला बोला। गुरूवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस चुनावी सुधारों के नाम पर देश में अराजकता फैला रहे हैं और सत्ता हासिल करना चाहती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जुबानी हमला करते हुए श्री सिंह ने कहा कि युवाओं को राजनीतिक टकराव का माध्यम बनाया जा रहा है।
रक्षामंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग बांग्लादेश के घटनाक्रम की तर्ज पर भारत में भी सत्ता परिवर्तन की कोशिश करना चाह रहे हैं, लेकिन राजनीतिक हितों के लिए संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाना कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस की लगातार हार की वजह वोट चोरी नहीं है बल्कि उनकी काम चोरी है। साल 1984 के बाद कांग्रेस केंद्र में कभी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी। जबकि उस समय बीजेपी दो लोकसभा सीटों की पार्टी थी जिसने साल 2014 और 2019 में केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने पार्टी के इतिहास की तीन घटनाओं का उल्लेख किया। रक्षा मंत्री श्री सिंह ने साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल, साल 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा और साल 1990 में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवकों पर हुई गोलीबारी के संदर्भ में कांग्रेस की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े किये।
रक्षा मंत्री ने इन सभी घटनाओं को कांग्रेस के शासनकाल और राजनीतिक संरक्षण से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने हमला करते हुए कहा कि आज भी कांग्रेस संविधान, संवैधानिक मूल्यों और संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने की ही कोशिश करेगी। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक पराजय का बदला देश की जनता से लेना चाहती है। उन्होंने इसे पार्टी के नैतिक पतन का उदाहरण भी करार दिया। श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के लिए झूठा आक्रोश दिखा रहे हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने गांधी नाम का इस्तेमाल करने का नैतिक अधिकार खो दिया है। उनके मुताबिक विपक्ष की राजनीति के कारण देश की विकास यात्रा बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से टकराव की राजनीति छोड़ने, जनता के जनादेश का सम्मान करने और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करने की अपील की। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का भविष्य टकराव में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में निहित है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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