उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था को लेकर एक नई पहल की तैयारी है। गांधी जयंती के अवसर पर प्रदेश के सैकड़ों गांवों में ऐसी सुविधा शुरू होने जा रही है, जिसका सीधा संबंध ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत से है। इस पहल के तहत घरों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार ने इसके साथ ही पेयजल योजनाओं के संचालन, गुणवत्ता और ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन कार्य के बाद सड़कों की मरम्मत पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
उत्तर प्रदेश में गांधी जयंती पर 341 गांवों के प्रत्येक घर में नल से पेयजल आपूर्ति शुरू की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। जलापूर्ति शुरू होने से ग्रामीणों को पानी के लिए घर से बाहर जाने की जरूरत कम होगी। इसके साथ ही प्रदूषित पानी से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है। यह पहल प्रदेश में ग्रामीण पेयजल सुविधाओं के विस्तार के तहत की जा रही है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक घर में नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराना है। प्रदेश में ग्रामीण पेयजल योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में गांवों को नल से जल सुविधा से जोड़ा जा चुका है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 38,281 गांवों में हर घर तक नल से पानी पहुंच रहा है, जबकि 28,385 गांवों में पेयजल आपूर्ति से संबंधित कार्य अंतिम चरण में है। और आज गांधी जयंती पर 341 गांवों में जलापूर्ति शुरू की जाएगी। इन आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में ग्रामीण पेयजल नेटवर्क के विस्तार का काम जारी है। अंतिम चरण में चल रहे गांवों में कार्य पूरा होने के बाद वहां भी घरों तक नल से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
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ग्रामीण क्षेत्रों में घरों तक पानी पहुंचने का सीधा संबंध परिवारों की दैनिक दिनचर्या से है। कई स्थानों पर पानी जुटाने के लिए घर से बाहर जाना पड़ता है। नल से जल की सुविधा शुरू होने पर महिलाओं और बेटियों को पानी लाने में लगने वाले समय और श्रम की बचत होगी। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के साथ महिलाओं और बेटियों का समय तथा श्रम बचाना भी है। उन्होंने बच्चों की शिक्षा से जुड़े लाभ का भी उल्लेख किया। घर में पानी उपलब्ध होने से बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने गांधी जयंती पर 341 गांवों में पेयजल आपूर्ति शुरू किए जाने को महात्मा गांधी की स्वच्छता और ग्राम स्वराज की भावना से जोड़ा। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता और ग्राम स्वराज को प्राथमिकता दी थी। इसी भावना के अनुरूप ग्रामीण परिवारों तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। मंत्री के अनुसार, इस पहल में ग्रामीण परिवारों की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। घरों तक पानी पहुंचने से महिलाओं और बेटियों के समय और श्रम की बचत होगी तथा बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उसके नियमित संचालन और रखरखाव का विषय भी महत्वपूर्ण है। जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार ने कहा कि पेयजल योजनाओं का संचालन और रखरखाव सुनिश्चित करने के साथ नियमित तथा गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति प्राथमिकता है। इसके लिए गांव जल एवं स्वच्छता समितियों के साथ ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। इस व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर लोगों की सहभागिता को महत्व दिया जा रहा है, ताकि पेयजल योजनाओं का संचालन और रखरखाव व्यवस्थित ढंग से किया जा सके।
ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन बिछाने के दौरान कई स्थानों पर सड़कों को नुकसान पहुंचने की समस्या सामने आती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश में क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों की मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत ऐसी सड़कों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां पाइपलाइन कार्य के दौरान सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। चिह्नित सड़कों की मरम्मत कर उन्हें दोबारा उपयोग योग्य बनाने का कार्य किया जा रहा है।
यदि किसी गांव में पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़क की मरम्मत नहीं हुई है, तो ग्रामीण जल सारथी ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए संबंधित सड़क की फोटो और वीडियो ऐप पर अपलोड करने की सुविधा दी गई है। इस व्यवस्था के जरिए ग्रामीण सड़क की स्थिति की जानकारी संबंधित व्यवस्था तक पहुंचा सकते हैं।
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