उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में राजस्व विभाग से जुड़े कामकाज को लेकर लेखपालों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान का इंतजार कर रहे लेखपालों ने अब अतिरिक्त जिम्मेदारियों के विरोध में आंदोलन तेज कर दिया है। शनिवार को जिले की सभी पांच तहसीलों में कार्य बहिष्कार और धरना जारी रहा। इस दौरान लेखपालों ने अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया।
अंबेडकरनगर जिले में लेखपालों ने शनिवार को पांचों तहसीलों में कार्य बहिष्कार करते हुए धरना दिया। आंदोलन के तहत लेखपालों ने अतिरिक्त क्षेत्रों का कार्य छोड़ दिया। इसके साथ ही संपूर्ण समाधान दिवस यानी तहसील दिवस का भी बहिष्कार किया। लेखपालों के इस कदम को उनकी लंबित मांगों और अतिरिक्त कार्यभार के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें पिछले 10 वर्षों से लंबित हैं, लेकिन अब तक उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। लेखपालों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
लेखपाल संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, लेखपालों को उनके मूल राजस्व संबंधी कार्यों के अतिरिक्त लगातार दूसरी जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। इससे उनके काम का दबाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण नियमित राजस्व कार्यों के निर्वहन पर भी असर पड़ रहा है। इसी के विरोध में लेखपालों ने अतिरिक्त क्षेत्रों का काम करने से इनकार किया है। लेखपालों ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वे अतिरिक्त कार्यभार स्वीकार नहीं करेंगे। उनकी प्रमुख मांगें लंबे समय से लंबित हैं और इनका समाधान किए जाने की आवश्यकता है।
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आंदोलन के दौरान लेखपालों ने संपूर्ण समाधान दिवस का भी बहिष्कार किया। तहसील दिवस पर आमतौर पर नागरिक अपनी राजस्व और अन्य प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों के समक्ष आवेदन और शिकायतें प्रस्तुत करते हैं। लेखपालों के बहिष्कार का उद्देश्य अपनी मांगों और विरोध को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है। जिले की पांचों तहसीलों में धरना और कार्य बहिष्कार जारी रहने से लेखपालों से संबंधित प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रभावित कार्यों की संख्या या आम नागरिकों को हुई देरी का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
लेखपालों के आंदोलन का नेतृत्व जिला अध्यक्ष जितेंद्र यादव और जिला मंत्री अखिलेश चौरसिया ने किया। अकबरपुर तहसील में तहसील अध्यक्ष शिवप्रकाश तिवारी और तहसील मंत्री अजीत राय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लेखपाल धरने पर बैठे। इस दौरान गरिमा चौधरी, कुलदीप वर्मा, राम रोमी और राहुल राना समेत अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। धरने में शामिल लेखपालों ने अपनी लंबित मांगों के समाधान और अतिरिक्त कार्यभार से राहत की मांग दोहराई।
लेखपाल संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें करीब 10 वर्षों से लंबित हैं। इस अवधि में मांगों के समाधान के लिए प्रयास किए जाने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी लंबित मांगों की अलग-अलग सूची, उनसे संबंधित विभागीय निर्णय या शासन स्तर पर हुई वार्ता का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। लेखपालों का कहना है कि मूल कार्यों के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारियां दिए जाने से काम का दबाव बढ़ रहा है। इसी वजह से उन्होंने अतिरिक्त क्षेत्र का कार्य छोड़ने का निर्णय लिया है।
लेखपालों ने कहा कि यदि उनकी 10 वर्षों से लंबित मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों ने अतिरिक्त कार्यभार स्वीकार नहीं करने और मांगों के समाधान तक विरोध जारी रखने की बात कही है। शनिवार को भी अंबेडकरनगर की पांचों तहसीलों में कार्य बहिष्कार और धरना जारी रहा। आंदोलन के तहत अतिरिक्त क्षेत्रों का कार्य छोड़ने के साथ संपूर्ण समाधान दिवस का बहिष्कार भी किया गया।
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