लखनऊ। शहर में वर्ष 2023 में सामने आए एक पत्नी हत्या मामले में अदालत ने आरोपी पति को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने घटना से जुड़े कई साक्ष्य और गवाहों के बयान रखे गए। इनमें मृतका के नाबालिग बेटे की गवाही भी शामिल रही, जिसे अदालत ने मामले की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण माना।
लखनऊ की विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) अदालत ने पत्नी जान्हवी अग्रहरि की हत्या के मामले में पति आनंदेश्वर उर्फ आनंद अग्रहरि को उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश रोहित सिंह ने दोषी पर छह लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अदालत के आदेश के अनुसार अर्थदंड की पूरी राशि मृतका के दोनों नाबालिग बच्चों को बराबर-बराबर दी जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी लखनऊ को बच्चों की पहचान सुनिश्चित करने के बाद राशि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों बच्चे फिलहाल अपने ननिहाल में नानी के साथ रहते हैं। इनमें से एक बच्चा मूक-बधिर है।
अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील विकास सिंह ने अदालत को बताया कि मृतका के भाई अमन साहू ने 5 दिसंबर 2023 को ठाकुरगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अभियोजन के अनुसार जान्हवी अग्रहरि की शादी वर्ष 2008 में आनंदेश्वर अग्रहरि से हुई थी। मामले में पति पर पत्नी की चाकू से हत्या करने का आरोप था। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने घटना से जुड़े साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए। अभियोजन की ओर से अदालत में कुल 10 गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से चार गवाह पेश हुए।
अभियोजन के अनुसार घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने उसे 18 दिसंबर 2023 को कानपुर रोड स्थित कृष्णा नगर मोहल्ले से गिरफ्तार किया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए जाने वाले चाकू की बरामदगी भी दिखाई थी। हालांकि, अदालत ने इस चाकू को हत्या में इस्तेमाल हुआ हथियार नहीं माना।
मामले की सुनवाई के दौरान मृतका के छोटे बेटे शौर्य अग्रहरि की गवाही महत्वपूर्ण रही। शौर्य ने अदालत को बताया कि 4 दिसंबर को उसके पिता उसे स्कूल से लेकर आए थे। उसके अनुसार रास्ते में सिर दर्द की दवा देने के नाम पर उसे कुछ पिलाया गया। घर पहुंचने के बाद वह सो गया और अगले दिन उसे होश आया। शौर्य के मुताबिक जब वह उठा तो घर में कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद उसने अपनी नानी को फोन किया। उसने घर में अलमारी के पास दीवार पर खून के धब्बे भी देखे थे। अदालत ने नाबालिग बेटे के बयान और घटना के बाद की परिस्थितियों पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि बच्चे को दवा पिलाकर सुलाना और उसके बाद बिना बताए घर से चले जाना आरोपी के बाद के आचरण से जुड़ा तथ्य है।
मामले में मृतका के बड़े बेटे की गवाही भी अदालत के सामने आई। अदालत ने उसके बयान को भी महत्वपूर्ण माना। बड़े बेटे की गवाही के अनुसार मृतका को आखिरी बार उसके पति के साथ ही जीवित देखा गया था। अदालत ने मामले के उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को एक साथ देखते हुए आरोपी को दोषी माना।
फैसले में अदालत ने विवेचना की कार्यप्रणाली को लेकर भी टिप्पणी की। अदालत के सामने यह तथ्य आया कि आरोपी के घर पर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था, लेकिन विवेचक ने उसकी फुटेज को साक्ष्य के रूप में संकलित नहीं किया था। मामले के विवेचक श्रीकांत राय के संबंध में अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि दोषी और मृतका की कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन, घर का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाने का प्रयास नहीं किया गया। इस तरह जांच के दौरान उपलब्ध हो सकने वाले कुछ तकनीकी साक्ष्यों को मामले की विवेचना में शामिल नहीं किया गया।
मामले में पुलिस की ओर से आरोपी की निशानदेही पर चाकू बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। इसके लिए दो स्वतंत्र गवाह भी बनाए गए थे। हालांकि, सुनवाई के दौरान दोनों स्वतंत्र गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। अभियोजन की ओर से पेश किया गया चाकू नया और चमचमाता हुआ रसोई का चाकू था। अदालत के समक्ष यह भी आया कि उसकी धार पर कोई क्षति नहीं थी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच से भी यह साबित नहीं हो सका कि चाकू पर मिला खून मृतका का ही था। इन परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने आरोपी की निशानदेही पर बरामद चाकू को हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार यानी आलाकत्ल नहीं माना।
फैसले में अदालत ने जांच में सामने आई कमियों का भी उल्लेख किया। साथ ही अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि विवेचक की ओर से छोड़ी गई कमियां अपने आप में अभियुक्त को बरी करने का आधार नहीं हो सकतीं। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए माना कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से अभियोजन का मामला युक्तियुक्त संदेह से परे साबित होता है। इसी आधार पर अदालत ने आनंदेश्वर उर्फ आनंद अग्रहरि को पत्नी जान्हवी अग्रहरि की हत्या के मामले में दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत ने छह लाख रुपये के अर्थदंड की राशि मृतका के दोनों नाबालिग बच्चों को बराबर-बराबर देने का आदेश दिया है। दोनों बच्चे वर्तमान में अपने ननिहाल में नानी के साथ रह रहे हैं। जिलाधिकारी लखनऊ बच्चों की पहचान सुनिश्चित करने के बाद अर्थदंड की राशि उन्हें उपलब्ध कराएंगे।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 10 गवाह अदालत में पेश किए गए। बचाव पक्ष ने चार गवाह पेश किए। सुनवाई के दौरान प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ-साथ गवाहों के बयानों पर भी अदालत ने विचार किया। नाबालिग बेटे और बड़े बेटे के बयान भी मामले की सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड किए गए।
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