Sunday, 27 September 2026 | Lucknow | 29°C

चार साल से फाइलों में दबा बेदखली का आदेश, तालाब की जमीन पर कब्जा बरकरार

देवा रोड की दयाल रेजीडेंसी से जुड़े मामले में 2022 में तहसीलदार ने दिया था आदेश, 40.03 लाख रुपये क्षतिपूर्ति भी की  थी तय
Bureau
Bureau News Desk
26 Sep 2026
04:07 PM
1 min read
चार साल से फाइलों में दबा बेदखली का आदेश, तालाब की जमीन पर कब्जा बरकरार
हाइलाइट्स
मामला लखनऊ के चिनहट क्षेत्र के ग्राम गणेशपुर रहमानपुर की करीब तीन बीघा जमीन से जुड़ा है।
लेखपाल की 18 फरवरी 2021 की रिपोर्ट में जमीन को तालाब के खाते में दर्ज बताया गया था।
रिपोर्ट में पक्का निर्माण, बाउंड्रीवाल, नाला और पक्की सड़क का उल्लेख था।
तहसीलदार सदर की अदालत ने 14 मार्च 2022 को बेदखली का आदेश पारित किया था।

लखनऊ। देवा रोड स्थित दयाल रेजीडेंसी से जुड़े भूमि विवाद में राजस्व विभाग के आदेश के अनुपालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। तालाब के खाते में दर्ज जमीन पर कब्जे के मामले में तहसीलदार सदर की अदालत ने 14 मार्च 2022 को बेदखली का आदेश पारित किया था। साथ ही ग्रामसभा को हुए नुकसान के एवज में 40 लाख तीन हजार 200 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद चार साल से अधिक समय बीतने के बाद भी मौके पर कब्जा बरकरार होने का आरोप है।

लखनऊ में कांग्रेस ने चुनाव आयोग और एसआईआर पर उठाए सवाल

मामला चिनहट क्षेत्र के ग्राम गणेशपुर रहमानपुर की करीब तीन बीघा जमीन से जुड़ा है। तहसीलदार की अदालत में प्रस्तुत 18 फरवरी 2021 की लेखपाल की आख्या में जमीन को तालाब के खाते में दर्ज बताया गया था। आख्या में यशार्थ पार्थ बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार सिंह की ओर से जमीन पर पक्का निर्माण, बाउंड्रीवाल, नाला और पक्की सड़क बनाए जाने का उल्लेख किया गया था।

अदालती आदेश के मुताबिक प्रतिवादी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन वह निर्धारित तिथियों पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। उसकी ओर से कोई आपत्ति या साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद लेखपाल की आख्या और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर तहसीलदार की अदालत ने संबंधित जमीन से प्रतिवादी को बेदखल करने का आदेश पारित किया।

आदेश में ग्रामसभा को हुई क्षति के एवज में 40,03,200 रुपये की वसूली करने के साथ ही आदेश के अनुपालन की कार्रवाई पूरी कर पत्रावली अभिलेखागार में दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे।

किसान अनिल का आरोप है कि तहसीलदार की अदालत से बेदखली का स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद जमीन अब तक कब्जामुक्त नहीं कराई गई है। किसान का कहना है कि आदेश के बाद राजस्व विभाग ने मौके पर क्या कार्रवाई की? चार साल से अधिक समय में बेदखली आदेश के अनुपालन की स्थिति क्या है? सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने की जिम्मेदारी  की थी और आदेश के बावजूद कार्रवाई में इतनी लंबी देरी क्यों हुई?

Explore Related Topics

लखनऊ चिनहट तालाब की जमीन भूमि विवाद दयाल रेजीडेंसी गणेशपुर रहमानपुर बेदखली आदेश तहसीलदार सदर राजस्व विभाग ग्रामसभा भूमि

 

टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें

इस खबर को खबर पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद

ऐसी ही खबरों के लिए निचे स्क्रॉल करें

या होम पेज पर लेटेस्ट न्यूज़ पढ़ने के लिए क्लिक करें →

Related News