लखनऊ। देवा रोड स्थित दयाल रेजीडेंसी से जुड़े भूमि विवाद में राजस्व विभाग के आदेश के अनुपालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। तालाब के खाते में दर्ज जमीन पर कब्जे के मामले में तहसीलदार सदर की अदालत ने 14 मार्च 2022 को बेदखली का आदेश पारित किया था। साथ ही ग्रामसभा को हुए नुकसान के एवज में 40 लाख तीन हजार 200 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद चार साल से अधिक समय बीतने के बाद भी मौके पर कब्जा बरकरार होने का आरोप है।
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मामला चिनहट क्षेत्र के ग्राम गणेशपुर रहमानपुर की करीब तीन बीघा जमीन से जुड़ा है। तहसीलदार की अदालत में प्रस्तुत 18 फरवरी 2021 की लेखपाल की आख्या में जमीन को तालाब के खाते में दर्ज बताया गया था। आख्या में यशार्थ पार्थ बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार सिंह की ओर से जमीन पर पक्का निर्माण, बाउंड्रीवाल, नाला और पक्की सड़क बनाए जाने का उल्लेख किया गया था।
अदालती आदेश के मुताबिक प्रतिवादी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन वह निर्धारित तिथियों पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। उसकी ओर से कोई आपत्ति या साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद लेखपाल की आख्या और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर तहसीलदार की अदालत ने संबंधित जमीन से प्रतिवादी को बेदखल करने का आदेश पारित किया।
आदेश में ग्रामसभा को हुई क्षति के एवज में 40,03,200 रुपये की वसूली करने के साथ ही आदेश के अनुपालन की कार्रवाई पूरी कर पत्रावली अभिलेखागार में दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे।
किसान अनिल का आरोप है कि तहसीलदार की अदालत से बेदखली का स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद जमीन अब तक कब्जामुक्त नहीं कराई गई है। किसान का कहना है कि आदेश के बाद राजस्व विभाग ने मौके पर क्या कार्रवाई की? चार साल से अधिक समय में बेदखली आदेश के अनुपालन की स्थिति क्या है? सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने की जिम्मेदारी की थी और आदेश के बावजूद कार्रवाई में इतनी लंबी देरी क्यों हुई?
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