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गोरखपुर से सीएम योगी का ऐलान, दिव्यांगजन पेंशन में फिर होगी बढ़ोतरी

गोरखपुर में 509 लाभार्थियों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए गए; वर्ष 2026-27 में हर विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाने का लक्ष्य
Bureau
Bureau News Desk
30 Sep 2026
08:53 PM
1 min read
गोरखपुर से सीएम योगी का ऐलान, दिव्यांगजन पेंशन में फिर होगी बढ़ोतरी
हाइलाइट्स
उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजन की पेंशन राशि में जल्द फिर बढ़ोतरी की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई पेंशन राशि का आंकड़ा अभी नहीं बताया।
प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
गोरखपुर में 509 लाभार्थियों को 664 सहायक उपकरण वितरित किए गए।

गोरखपुर, 30 सितंबर। उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजन कल्याण से जुड़ी योजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को गोरखपुर में कई घोषणाएं कीं। कार्यक्रम में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित किए गए और उनके लिए संचालित योजनाओं के विस्तार से जुड़ी जानकारी साझा की गई। इसी दौरान पेंशन को लेकर भी एक महत्वपूर्ण घोषणा सामने आई, जबकि पुनर्वास सेवाओं को प्रदेश के सभी मंडलों तक पहुंचाने की दिशा में निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि में जल्द ही एक बार फिर बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री बुधवार को सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह में शामिल हुए।

कार्यक्रम में 509 लाभार्थियों को विभिन्न प्रकार के 664 सहायक उपकरण वितरित किए गए। इनमें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, ट्राइसाइकिल, स्मार्टकेन, ब्रेल किट, हियरिंग एड और स्मार्टफोन सहित अन्य उपकरण शामिल रहे। कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित किया गया था।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दिव्यांगजन को मिलने वाली पेंशन राशि में जल्द ही फिर बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले दिव्यांगजन को 300 रुपये पेंशन दी जाती थी। इसके बाद इसे बढ़ाकर 500 रुपये और फिर 1,000 रुपये किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार अब कुछ दिनों में इसमें फिर वृद्धि की जाएगी। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित नई राशि का उल्लेख नहीं किया। पेंशन में अगली बढ़ोतरी की घोषणा ऐसे समय हुई है जब राज्य सरकार दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा, पुनर्वास, शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं के विस्तार की बात कर रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में सीतापुर आई हॉस्पिटल परिसर में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र शुरू हो चुका है। इन केंद्रों के माध्यम से दिव्यांगजनों को उनके आसपास पुनर्वास संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने की योजना है।

गोरखपुर में संचालित दिव्यांगजनों से जुड़े संस्थानों का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। इनमें स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालक एवं बालिका इंटर कॉलेज, संकेत राजकीय मूकबधिर विद्यालय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज का मनोविकास केंद्र और राजकीय कौशल विकास केंद्र शामिल हैं। सरकार के 2026-27 के बजट दस्तावेज में भी दिव्यांगजनों के लिए जिला स्तर पर पुनर्वास सेवाओं और निकटवर्ती केंद्रों के माध्यम से कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए प्रावधान का उल्लेख किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन शिविरों के जरिए उन दिव्यांगजनों को योजनाओं से जोड़ने की बात कही गई है, जो पेंशन सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से अभी बाहर हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की डिजिटल पहचान मजबूत कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने दिव्यांगजन सशक्तीकरण को बचपन से शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके तहत शुरुआती जांच, थेरेपी, अभिभावकों को मार्गदर्शन, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता पर ध्यान देने की बात कही गई।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने तीन से सात वर्ष की आयु के श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों के विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शुरुआती उम्र में जांच और आवश्यक सहायता मिलने से बच्चों की शिक्षा और प्रशिक्षण को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सरकार की ओर से ऐसे बच्चों के लिए विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता पर भी जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के 2026-27 के बजट से जुड़े दस्तावेज में भी तीन से सात वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों के शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।

मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजनों को विभिन्न स्वरोजगार और आर्थिक सहायता योजनाओं से जोड़ने की बात कही। इनमें मुख्यमंत्री युवा, पीएम स्वनिधि, एक जिला एक उत्पाद, पीएम विश्वकर्मा, पीएम मुद्रा और स्टैंडअप जैसी योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश सरकार कॉक्लियर इंप्लांट पर छह लाख रुपये तक के खर्च के साथ स्पीच थेरेपी में भी सहयोग करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण केवल पेंशन या सहायता उपकरण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा होना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कहा, “प्रतिभा को दया नहीं, अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।” उन्होंने कहा कि शारीरिक चुनौती प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बन सकती। अपने संबोधन में उन्होंने ऋषि अष्टावक्र, महाकवि सूरदास, संगीतकार रवींद्र जैन और पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा सहित पैरालंपिक खिलाड़ियों का उदाहरण दिया। उन्होंने दीपा मलिक, सुहास एलवाई, सुमित अंतिल, देवेंद्र, भाविना पटेल, वैभव गौतम, प्रवीण कुमार और प्रीति पाल का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजनों के लिए सुविधाओं को सुलभ बनाने की दिशा में ब्रेल और ऑडियो सूचना, टैक्टाइल पाथ, सुलभ डिजिटल सेवाएं, सांकेतिक भाषा, कैप्शन और विजुअल अलर्ट जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए अधिकार और सम्मान आधारित व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया और इसे सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव से जोड़ा।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा को दिव्यांगजन सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं। इनमें लखनऊ का डॉ. शकुंतला मिश्रा दिव्यांगजन सशक्तीकरण विश्वविद्यालय और चित्रकूट का जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय शामिल हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार शिक्षा, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता के माध्यम से दिव्यांगजनों को अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।

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