>अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ व्यापार सलाहकार पीटर नेवारो द्वारा भारत के खिलाफ हाल ही में की गई विवादित टिप्पणियों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को कड़ा प्रतिक्रिया दी। थरूर ने कहा कि जब दोनों देशों के संबंध मजबूत और निकट हो रहे हैं, तब ऐसी भाषा की कोई आवश्यकता नहीं थी।
>नेवारो ने भारत को हाल ही में “महाराजा ऑफ़ टैरिफ्स”, “रूस की लांड्री मशीन” और यूक्रेन संकट को “मोदी की जंग” जैसे विवादित उपनामों से संबोधित किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि “ब्राह्मण भारतीय जनता की कीमत पर लाभ कमा रहे हैं।”
>थरूर ने तिरुवनंतपुरम से दिए गए साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ की असमानता ने भारत में स्पष्ट रूप से गहरा आक्रोश पैदा किया है। “ट्रंप के अपने बयान और ट्वीट में प्रयोग की गई भाषा और उनके सलाहकार नेवारो के अत्यंत अपमानजनक बयान पूरे देश में आलोचना का कारण बने हैं। अगर 30 साल पुराने रिश्तों में कोई खास समस्या नहीं है, जो पहले से ही और निकट हो रहे हैं, तो भारत के बारे में ऐसी भाषा का प्रयोग क्यों किया गया? यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।”
>थरूर ने आगे कहा कि डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ को “जादुई उपकरण” मानते हैं, जिससे वे अपने कई समस्याओं का समाधान करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिका के राष्ट्रपति का इरादा आयातित वस्तुओं को महंगा बनाकर अमेरिकी निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन शुरू करने के लिए प्रेरित करना है। यह अमेरिकी श्रमिकों को रोजगार देने और उनके राजनीतिक आधार को मजबूत करने की उनकी रणनीति का हिस्सा है।”
>उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने और बाद में रूस से तेल की खरीद के लिए अतिरिक्त 25 प्रतिशत ‘दंडात्मक शुल्क’ लगाने का निर्णय भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में तनाव पैदा करने वाला रहा।
>कांग्रेस सांसद शशि थरूर के इस बयान को विशेषज्ञों ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक निकटता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना है। उनका मानना है कि द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने और सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाने के समय ऐसी टिप्पणी अनुचित और अनुचित है।
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