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अब ‘वंदे मातरम्’ का अपमान पड़ेगा भारी! संसद से पास हुआ नया कानून, हो सकती है 3 साल तक की जेल

लोकसभा और राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ जैसा कानूनी संरक्षण मिलेगा। जानबूझकर अपमान, अनादर या गायन में बाधा डालने पर तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान होगा।
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Bureau News Desk
31 Jul 2026
05:51 PM
1 min read
अब ‘वंदे मातरम्’ का अपमान पड़ेगा भारी! संसद से पास हुआ नया कानून, हो सकती है 3 साल तक की जेल
हाइलाइट्स
संसद ने ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी।
‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण मिलेगा।
जानबूझकर अपमान, अनादर या गायन में बाधा डालने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान।
राज्यसभा और लोकसभा से विधेयक पारित, अब राष्ट्रपति की मंजूरी शेष।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को अब कानून के तहत विशेष संरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया है। संसद ने ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी है। इसके लागू होने के बाद ‘वंदे मातरम्’ को भी वही कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी, जो अब तक केवल राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रीय ध्वज को हासिल थी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा।

नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करता है, उसके गायन में बाधा डालता है या सार्वजनिक रूप से उसका अनादर करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान किया गया है। यही दंड व्यवस्था पहले से राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामलों में लागू है।

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यह संशोधन विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा से पारित हो चुका है। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े मामलों में भी स्पष्ट कानूनी प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे।

सरकार का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की पहचान और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक रहा है। आजादी की लड़ाई के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी गीत से प्रेरणा लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। सरकार का मानना है कि देश की राष्ट्रीय अस्मिता और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े इस गीत को कानूनी संरक्षण देना समय की आवश्यकता थी।

विधेयक पर संसद में चर्चा के दौरान कुछ विपक्षी दलों ने इसकी आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा कानून पर्याप्त हैं और अलग संशोधन की जरूरत नहीं थी।

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इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कानून सिर्फ जानबूझकर किए गए अपमान या अनादर के मामलों में ही लागू होगा। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभर में देशभक्ति और आजादी की भावना का प्रमुख प्रतीक बन गया।

इसके बाद 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था। अब वर्ष 2026 में पारित इस संशोधन विधेयक के माध्यम से राष्ट्रीय गीत को भी औपचारिक कानूनी संरक्षण देने की प्रक्रिया पूरी होने जा रही है।

नया कानून लागू होने के बाद राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े मामलों में स्पष्ट कानूनी कार्रवाई संभव होगी। इससे पहले कानून में राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान पर दंड का प्रावधान था, जबकि अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ भी उसी श्रेणी में शामिल हो जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों की कानूनी सुरक्षा और मजबूत होगी।

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