करीब छह साल पुराने चर्चित अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले में अन्य दोषियों नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी विभिन्न धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा दी। साथ ही सभी दोषियों पर अलग-अलग धाराओं में जुर्माना भी लगाया गया।
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था।
दिल्ली की अदालत ने इससे पहले 13 जुलाई को ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया था। दोष सिद्ध होने के बाद अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था और 31 जुलाई को निर्णय सुनाने की तारीख तय की थी।
सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत से कहा कि अंकित शर्मा की हत्या पूरी तरह सुनियोजित, अत्यंत क्रूर और समाज में भय पैदा करने वाली थी। विशेष लोक अभियोजक ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' श्रेणी का मामला बताते हुए दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की थी। उनका कहना था कि ऐसे अपराधों में कठोरतम दंड समाज के लिए एक स्पष्ट संदेश देने के लिए आवश्यक है।
वहीं, बचाव पक्ष ने मृत्युदंड का विरोध करते हुए अदालत से कहा कि यह मामला 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' की श्रेणी में नहीं आता। दोषियों की पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कम सजा देने का अनुरोध किया गया। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि अंकित शर्मा की हत्या अत्यंत क्रूर तरीके से की गई और हत्या के बाद उनका शव नाले में फेंक दिया गया। अदालत ने इसे समाज को झकझोर देने वाला अपराध बताया। न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल दोषियों के परिवार के आश्रित होने का आधार सजा कम करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष द्वारा ताहिर हुसैन के घर को दंगों का 'लॉन्च पैड' बताए जाने संबंधी तर्क इस मुकदमे में लगाए गए आरोपों का हिस्सा नहीं था, इसलिए उस पर अलग से विचार नहीं किया गया।
26 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांदबाग क्षेत्र में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। बाद में उनका शव एक नाले से बरामद हुआ था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी प्रमुख आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अब उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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