अनिश्चितता के बाद 5088 अभ्यर्थियों को मिला एक और मौका, 11 केंद्रों पर कड़ी निगरानी में हुई परीक्षा

प्रश्नपत्र लीक की आशंका के बाद रद्द हुई परीक्षा के बाद छात्रों के लिए फिर खुला डॉक्टर बनने के सपने का रास्ता, सभी केंद्रों पर सुरक्षा और निगरानी के विशेष इंतजाम
Bureau 21 Jun 2026, 01:27 PM 1 min read
अनिश्चितता के बाद 5088 अभ्यर्थियों को मिला एक और मौका, 11 केंद्रों पर कड़ी निगरानी में हुई परीक्षा

 

अंबेडकरनगर, रवि दुबे। कई महीनों की तैयारी, परीक्षा रद्द होने के बाद पैदा हुई चिंता और फिर दोबारा मिले अवसर के बीच रविवार का दिन हजारों अभ्यर्थियों के लिए बेहद अहम रहा। एनटीए की ओर से आयोजित नीट यूजी पुनर्परीक्षा में जिले के 11 केंद्रों पर 5088 अभ्यर्थी शामिल हुए। परीक्षा केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि उन विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई शुरुआत भी थी, जो पिछले घटनाक्रम के बाद दोबारा परीक्षा का इंतजार कर रहे थे।

 

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इस बार परीक्षा केवल अभ्यर्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए भी बड़ी जिम्मेदारी मानी जा रही थी। पूर्व में प्रश्नपत्र लीक की आशंका के चलते परीक्षा निरस्त किए जाने के बाद पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया था। इसी कारण सभी 11 परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत किया गया।

 

परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। सभी परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए गए ताकि किसी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक अनियमितता या नकल की संभावना को रोका जा सके। इसके अलावा पुलिस बल की तैनाती के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई, जिससे पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित और सुरक्षित बनी रहे।

 

परीक्षा के दौरान केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि यातायात व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी गई। ट्रैफिक पुलिस को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई ताकि परीक्षार्थियों को समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। जाम जैसी स्थितियों से बचने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की गई थीं।

 

लंबे समय से तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह पुनर्परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके परिवारों में भी उत्साह और उम्मीद का माहौल देखने को मिला। कई अभिभावक सुबह से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की कामना करते नजर आए।

 

जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि परीक्षा से जुड़ी प्रत्येक व्यवस्था समयबद्ध और प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जाए। प्रशासन का उद्देश्य परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न कराना था, ताकि अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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