जब अस्पताल के डॉक्टरों ने ही बताया क्यों जरूरी है रोज एक घंटा योग, लखनऊ के बलरामपुर चिकित्सालय में दिखी अलग तस्वीर

योग दिवस पर सिर्फ औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि डॉक्टरों और योग विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य, फेफड़ों की क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े अहम पहलुओं पर डाली रोशनी।
Bureau 21 Jun 2026, 01:17 PM 1 min read
जब अस्पताल के डॉक्टरों ने ही बताया क्यों जरूरी है रोज एक घंटा योग, लखनऊ के बलरामपुर चिकित्सालय में दिखी अलग तस्वीर

 

अस्पतालों को आमतौर पर बीमारियों के इलाज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर लखनऊ के बलरामपुर चिकित्सालय में एक अलग तस्वीर देखने को मिली। यहां डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, सुरक्षा कर्मियों और स्कूल ऑफ नर्सिंग के छात्र-छात्राओं ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया। कार्यक्रम भारत सरकार के कॉमन योग प्रोटोकॉल के अनुसार आयोजित किया गया, जिसका संचालन योग विशेषज्ञ डॉ. नन्दलाल यादव 'जिज्ञासु' ने किया।

 

योग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सालय के निदेशक डॉ. विवेक गुप्ता ने कहा कि स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में योग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और आज पूरी दुनिया इसकी उपयोगिता को स्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से कई बीमारियों की रोकथाम संभव है और व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकता है।

 

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने कहा कि यदि बाल्यावस्था से ही योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है और व्यक्तित्व के समग्र विकास में मदद मिलती है। उनके अनुसार, नियमित योगाभ्यास से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलता है।

 

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वर्तमान समय में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को लेकर भी कार्यक्रम में चर्चा हुई। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि विशेष रूप से युवा वर्ग इन चुनौतियों से अधिक प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग एक घंटे का योग मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बलरामपुर चिकित्सालय के आयुष विभाग में नियमित रूप से चिकित्सकीय योगाभ्यास कराया जाता है, जहां विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे लोग स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

 

कार्यक्रम के दौरान पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. आनंद कुमार गुप्ता ने श्वसन स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भुजंगासन, उष्ट्रासन, उत्तान मंडूकासन और धनुरासन के साथ-साथ नाड़ी शोधन, कपालभाति और भस्त्रिका जैसे प्राणायाम फेफड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये अभ्यास अस्थमा और श्वसन संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में भी उपयोगी साबित होते हैं।

 

योग दिवस कार्यक्रम में चिकित्सालय के निदेशक डॉ. विवेक गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव समेत चिकित्सकगण, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, स्कूल ऑफ नर्सिंग के छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण, सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन एवं योगाभ्यास का निर्देशन योग विशेषज्ञ डॉ. नन्दलाल यादव 'जिज्ञासु' ने किया।

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