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Meerut Blue Drum Case: मुस्कान और साहिल की फांसी के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में मंजूर, 30 नवंबर को सुनवाई

Meerut Blue Drum Case: सौरभ हत्याकांड में आरोपी मुस्कान और साहिल को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों की फांसी की सजा के खिलाफ दायर अपील स्वीकार कर ली है।
Bureau
Bureau News Desk
27 Oct 2026
01:33 PM
1 min read
Meerut Blue Drum Case: मुस्कान और साहिल की फांसी के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में मंजूर, 30 नवंबर को सुनवाई
सोर्स-फाइल फोटो
हाइलाइट्स
सौरभ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को राहत
फांसी की सजा के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में मंजूर
30 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सजा बरकरार रहने या बदलने पर टिकी निगाहें

Meerut Blue Drum Case:  मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में आरोपी मुस्कान और साहिल को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दोनों की फांसी की सजा के खिलाफ दायर अपील स्वीकार कर ली है। कोर्ट ने निचली अदालत से मामले से जुड़े सभी दस्तावेज मंगाए हैं। अब इस मामले में 30 नवंबर को सुनवाई होगी। मेरठ की सत्र अदालत ने सौरभ हत्याकांड को बेहद गंभीर मामला मानते हुए मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया था। अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की है। 

अपील में कहा गया है कि सजा सुनाते समय कुछ कानूनी पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी आधार पर दोनों ने फांसी की सजा रद्द करने या कम करने की मांग की है।उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की है। कोर्ट अब निचली अदालत के फैसले और मामले से जुड़े सबूतों की जांच करेगा। इसके बाद तय होगा कि फांसी की सजा बरकरार रहेगी या उसमें कोई बदलाव होगा। फांसी की सजा वाले मामलों में उच्च न्यायालय की मंजूरी जरूरी होती है। इसके अलावा दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने का भी अधिकार होता है।

यह मामला पिछले साल मार्च में सामने आया था। मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर अपने पति सौरभ की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में रखे गए और उसमें सीमेंट का घोल डाल दिया गया। बताया गया कि वारदात के बाद दोनों हिमाचल प्रदेश चले गए थे। करीब 10 दिन बाद उनके लौटने पर मामले का खुलासा हुआ और पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था।

वहीं कवयित्री अनामिका जैन अंबर ने पिछले हफ्ते जेल में मुस्कान से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने मुस्कान की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने या कुछ समय के लिए टालने की मांग की। अनामिका का कहना है कि मां के अपराध की सजा उसकी बेटी को नहीं मिलनी चाहिए। मुस्कान ने जेल में एक बेटी को जन्म दिया है। अनामिका चाहती हैं कि बच्ची के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मुस्कान को फांसी देने के फैसले पर विचार किया जाए।अब इस मामले में 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें रहेंगी। हाईकोर्ट के फैसले से आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय होगी।

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