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सुबह 4 बजे शुरू हुई चढ़ाई, 8.5 घंटे बाद 5,826 मीटर पर लहराया तिरंगा

बर्फीले रास्तों, खड़ी चढ़ाई और कम ऑक्सीजन के बीच 8 घंटे 30 मिनट की मेहनत के बाद हासिल किया 5,826 मीटर का शिखर।
Bureau
Bureau News Desk
13 Sep 2026
02:16 PM
1 min read
सुबह 4 बजे शुरू हुई चढ़ाई, 8.5 घंटे बाद 5,826 मीटर पर लहराया तिरंगा
हाइलाइट्स
लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने 5,826 मीटर ऊंचे माउंट रुद्रगैरा के शिखर पर तिरंगा फहराया।
अभियान की शुरुआत 7 सितंबर को सुबह करीब नौ बजे गंगोत्री से हुई।
दो दिन की ट्रेकिंग के बाद टीम करीब 4,350 मीटर ऊंचे रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची।
10 सितंबर को सुबह करीब चार बजे अंतिम शिखर चढ़ाई शुरू हुई और करीब 8 घंटे 30 मिनट बाद पूर्वा शिखर पर पहुंचीं।

लखनऊ। लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित 5,826 मीटर ऊंचे माउंट रुद्रगैरा के शिखर पर पहुंचकर भारतीय तिरंगा फहराया। कठिन मौसम, बर्फीले रास्तों, खड़ी चढ़ाई और ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन जैसी परिस्थितियों के बीच पूरा किया गया यह अभियान उनके पर्वतारोहण सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।

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पूर्वा धवन और उनकी टीम ने इस अभियान की शुरुआत गंगोत्री से की थी। दो दिन की ट्रेकिंग के बाद टीम करीब 4,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची। इसके बाद शिखर तक पहुंचने के लिए अंतिम चढ़ाई की तैयारी की गई। 10 सितंबर को सुबह करीब चार बजे पूर्वा और उनकी टीम ने बेस कैंप से शिखर अभियान शुरू किया। लगभग आठ घंटे 30 मिनट की लगातार चढ़ाई के बाद उन्होंने करीब 1,300 मीटर की ऊंचाई का कठिन हिस्सा पार किया और दोपहर करीब 12:30 बजे 5,826 मीटर ऊंचे माउंट रुद्रगैरा के शिखर पर पहुंचीं। शिखर पर उन्होंने भारतीय तिरंगा फहराया।

रुद्रगैरा अभियान की शुरुआत 7 सितंबर की सुबह करीब नौ बजे गंगोत्री से हुई। शुरुआती चरण में टीम ने ट्रेकिंग के जरिए ऊंचाई की ओर बढ़ना शुरू किया। दो दिनों तक लगातार कठिन रास्तों पर चलने के बाद टीम रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची। बेस कैंप करीब 4,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित था। इस ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अभियान का चुनौतीपूर्ण हिस्सा शुरू हुआ। जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है। पर्वतारोहियों को बर्फीली ढलानों, चट्टानी रास्तों और मौसम में बदलाव जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। पूर्वा ने बेस कैंप पर आवश्यक तैयारी के बाद शिखर तक पहुंचने के लिए अंतिम अभियान की तैयारी की। टीम ने ऊंचाई और रास्ते की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आगे की चढ़ाई शुरू की।

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माउंट रुद्रगैरा के शिखर तक पहुंचने के लिए 10 सितंबर को सुबह करीब चार बजे अंतिम चढ़ाई शुरू की गई। उस समय अंधेरा था और टीम को बर्फ तथा चट्टानों से होकर आगे बढ़ना था। लगातार करीब आठ घंटे 30 मिनट तक चढ़ाई करने के बाद पूर्वा ने लगभग 1,300 मीटर की ऊंचाई का कठिन हिस्सा पार किया। लंबे समय तक जारी रही इस चढ़ाई के बाद करीब दोपहर 12:30 बजे वह माउंट रुद्रगैरा के 5,826 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचीं। शिखर पर पहुंचने के बाद पूर्वा ने भारतीय तिरंगा फहराया। इस तरह गंगोत्री से शुरू हुआ अभियान रुद्रगैरा की चोटी पर पहुंचकर पूरा हुआ।

माउंट रुद्रगैरा अभियान के दौरान ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की उपलब्धता कम होती गई। इसके अलावा टीम को बर्फीले रास्तों और चट्टानी हिस्सों से होकर गुजरना पड़ा। पर्वतारोहण में ऊंचाई पर शरीर पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में लंबी और लगातार चढ़ाई के लिए शारीरिक तैयारी के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी होती है। पूर्वा ने इन परिस्थितियों के बीच अभियान जारी रखा और निर्धारित शिखर तक पहुंचीं। रुद्रगैरा के शिखर पर तिरंगा फहराना अभियान का प्रमुख उपलब्धि वाला चरण रहा। यह अभियान पूर्वा के आगे के पर्वतारोहण लक्ष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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पूर्वा धवन अपने पर्वतारोहण अभियानों को महिला सशक्तीकरण और बेटियों को आगे बढ़ने के संदेश से जोड़ती रही हैं। उनके अभियान का एक उद्देश्य युवाओं और खासकर बेटियों को चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में आगे आने के लिए प्रेरित करना है। स्रोत के अनुसार, मई 2018 में पूर्वा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का बैनर सौंपा था। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों को प्रोत्साहित करते हुए शुभकामनाएं दी थीं। रुद्रगैरा अभियान के जरिए भी पूर्वा ने पर्वतारोहण को महिला सशक्तीकरण के संदेश से जोड़ने का प्रयास किया। उनका लक्ष्य है कि अधिक से अधिक युवा और बेटियां पर्वतारोहण जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में आगे आएं।

पूर्वा धवन के अभियान का एक अन्य पहलू हिमालयी पर्यावरण से जुड़ा है। वह ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ जैसी पहल के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों को प्लास्टिक कचरे से बचाने का संदेश दे रही हैं। हिमालयी क्षेत्रों में पर्वतारोहण और पर्यटन गतिविधियों के दौरान प्लास्टिक तथा अन्य कचरा पर्यावरण से जुड़ी चुनौती बनता है। पर्वतारोहण अभियानों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और लोगों द्वारा छोड़ा गया कचरा पर्वतीय क्षेत्रों की स्वच्छता को प्रभावित कर सकता है। पूर्वा अपने अभियानों के माध्यम से पर्वतों को स्वच्छ रखने और प्लास्टिक कचरे को कम करने के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दे रही हैं। इस पहल के जरिए उनके पर्वतारोहण अभियान को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा गया है।

माउंट रुद्रगैरा की चढ़ाई के बाद पूर्वा धवन का अगला बड़ा लक्ष्य माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करना है। समुद्र तल से 8,848.86 मीटर की ऊंचाई वाला एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है। एवरेस्ट अभियान के लिए पर्वतारोहियों को ऊंचाई पर लंबे समय तक रहने की क्षमता, शारीरिक फिटनेस, तकनीकी पर्वतारोहण कौशल, मौसम की जानकारी और मानसिक तैयारी की जरूरत होती है। रुद्रगैरा पर 5,826 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने के दौरान पूर्वा को ऊंचाई वाले वातावरण और कठिन पर्वतीय परिस्थितियों का अनुभव मिला। वह इस अनुभव को अपने आगामी एवरेस्ट अभियान की तैयारी में इस्तेमाल करना चाहती हैं। रुद्रगैरा अभियान इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि यह पूर्वा के अब तक के पर्वतारोहण अनुभव में एक और ऊंचाई जोड़ता है। शिखर पर तिरंगा फहराने के बाद उनकी तैयारी अब अगले लक्ष्य की ओर केंद्रित है।

पूर्वा धवन ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग और अभियान से जुड़े लोगों के मार्गदर्शन को दिया है। पर्वतारोहण अभियान में पर्वतारोही के साथ प्रशिक्षक, गाइड और पूरी टीम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। अभियान के दौरान शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा के मार्गदर्शन को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। गंगोत्री क्षेत्र में प्रशिक्षण और अभियान की तैयारियों ने पूर्वा को कठिन पर्वतीय परिस्थितियों के लिए तैयार करने में सहयोग किया। किसी ऊंची पर्वत चोटी तक पहुंचने के अभियान में शुरुआती ट्रेकिंग से लेकर बेस कैंप की तैयारी और अंतिम शिखर चढ़ाई तक कई चरण होते हैं। रुद्रगैरा अभियान में भी पूर्वा और उनकी टीम ने इन्हीं चरणों से गुजरते हुए शिखर तक का सफर पूरा किया।

रुद्रगैरा अभियान की प्रमुख तारीखों के अनुसार, 7 सितंबर को सुबह करीब नौ बजे गंगोत्री से यात्रा शुरू हुई। इसके बाद दो दिन की ट्रेकिंग के दौरान टीम रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची। बेस कैंप करीब 4,350 मीटर की ऊंचाई पर था। यहां आवश्यक तैयारी के बाद 10 सितंबर को सुबह चार बजे अंतिम शिखर अभियान शुरू किया गया। करीब आठ घंटे 30 मिनट की चढ़ाई के बाद दोपहर करीब 12:30 बजे पूर्वा 5,826 मीटर ऊंचे माउंट रुद्रगैरा के शिखर पर पहुंचीं। शिखर पर भारतीय तिरंगा फहराया गया। इस अभियान में गंगोत्री से लेकर बेस कैंप और फिर शिखर तक की यात्रा शामिल रही। अंतिम चरण में करीब 1,300 मीटर की ऊंचाई का कठिन हिस्सा पार किया गया।

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