लखनऊ। गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के असर के बीच शनिवार को जिलाधिकारी विशाख जी ने इटौंजा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का मौके पर निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने गोमती नदी के किनारे बसे इलाकों में जलभराव, सड़क और आवागमन की स्थिति का जायजा लिया तथा ग्रामीणों और किसानों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने जलभराव, खराब पुलिया, जलनिकासी और आवागमन की समस्या जिलाधिकारी के सामने रखी। किसानों ने बाढ़ और जलभराव से फसलों को हुए नुकसान तथा फसल बीमा और मुआवजे से संबंधित कार्रवाई की मांग भी उठाई। प्रशासन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत और सुरक्षा व्यवस्था के लिए नाव की व्यवस्था, पुलिस की तैनाती और स्वास्थ्य संबंधी इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं, भविष्य में जलभराव से संपर्क प्रभावित न हो, इसके लिए सुल्तानपुर-बहादुरपुर मार्ग को ऊंचा बनाने की प्रक्रिया पर भी काम किया जा रहा है।
डीएम विशाख जी ने निरीक्षण के दौरान सुल्तानपुर-बहादुरपुर मार्ग पर जलभराव की स्थिति देखी। इस मार्ग पर पानी भरने के कारण स्थानीय लोगों के आवागमन से जुड़ी समस्याओं की जानकारी प्रशासन को दी गई। ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में जगह-जगह बनी डाट पुलिया और जलनिकासी की समस्या के कारण बारिश तथा बाढ़ के दौरान पानी जमा हो जाता है। इससे सड़क और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होता है।
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जिलाधिकारी ने मौके पर अधिकारियों के साथ स्थिति का निरीक्षण किया और बारिश तथा बाढ़ का असर कम होने के बाद सड़क से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान कराने की बात कही। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के सामने आवागमन की समस्या को देखते हुए सुल्तानपुर-बहादुरपुर मार्ग को ऊंचा बनाने की योजना पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सड़क को लासा गांव की तर्ज पर विकसित करने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
प्रशासन की ओर से बताया गया कि जलभराव को ध्यान में रखते हुए सड़क को ऊंचा करने का उद्देश्य भविष्य में बारिश और बाढ़ के दौरान संपर्क व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना है। जानकारी के अनुसार, दोनों मार्गों के निर्माण की प्रक्रिया जिलाधिकारी के विवेकाधीन कोष से कराई जा रही है। इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के आवागमन को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल नाव की व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है। जलभराव वाले मार्ग पर नाव उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि स्थानीय लोगों को पानी के बीच से पैदल आवागमन न करना पड़े। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी भी लगाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को जलभराव वाले इलाकों में दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानी बरतने तथा अराजक तत्वों पर नजर रखने को कहा गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित मार्ग पर लोगों के आवागमन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरत के समय आवाजाही में सहायता उपलब्ध कराना है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को लेकर भी व्यवस्थाएं की हैं। प्रभावित गांवों में पशुओं के लिए मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। इन शिविरों में पशु चिकित्सकों की टीम स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार कर रही है।
ग्रामीणों के लिए भी सामान्य स्वास्थ्य संबंधी दवाओं का वितरण किया गया। इनमें सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी सामान्य बीमारियों की दवाएं शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का फोकस जलभराव के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर है।
निरीक्षण के दौरान किसानों ने बाढ़ और जलभराव के कारण फसलों को हुए नुकसान की जानकारी जिलाधिकारी को दी। किसानों ने फसल बीमा और नुकसान के मुआवजे से जुड़ी कार्रवाई की मांग रखी। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित किसानों की समस्याओं पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को सोमवार तक फसल बीमा से संबंधित जरूरी कार्रवाई पूरी कराने के लिए कहा गया है।
प्रशासन के अनुसार, अब तक करीब 200 किसानों की क्षतिग्रस्त फसलों से संबंधित दस्तावेज जुटाए जा चुके हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि पात्र किसानों की जानकारी और दस्तावेजी प्रक्रिया अधूरी न रहे। जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान एडीएम राकेश सिंह समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की स्थिति को देखते हुए सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को भी मौके पर शामिल किया गया।
निरीक्षण के दौरान अलग-अलग विभागों से संबंधित समस्याओं और राहत व्यवस्था की समीक्षा की गई। अधिकारियों को प्रभावित गांवों में लोगों की जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से सीधे बातचीत कर सड़क, पुलिया, जलनिकासी, आवागमन, नाव, दवाइयों और फसल नुकसान से संबंधित समस्याएं बताईं।
ग्रामीणों की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों के साथ संबंधित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। सड़क की समस्या के स्थायी समाधान के लिए बाढ़ और बारिश का असर कम होने के बाद निर्माण कार्य से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई।
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