जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति रद्द किए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि केवल कुछ लोगों के अधिक संख्या में आने की आशंका के आधार पर प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक कैसे लगाई जा सकती है। मामला क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के दिल्ली पुलिस के फैसले को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस प्रदर्शन की अनुमति देते समय आवश्यक शर्तें और पाबंदियां लगा सकती है। अदालत ने यह भी पूछा कि यदि प्रदर्शनकारी कुछ घंटों के लिए निर्धारित स्थान पर रहेंगे और वहां से आगे नहीं बढ़ेंगे, तो उन्हें प्रदर्शन से पूरी तरह रोकने का आधार क्या है।
अदालत को बताया गया कि दिल्ली पुलिस ने पहले 20 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति दी थी। इसके बाद 15 सितंबर को पुलिस की ओर से एक पत्र जारी कर अनुमति वापस लिए जाने की जानकारी दी गई। पुलिस के अनुसार, उसे आशंका थी कि निर्धारित संख्या से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं।
यह खबर भी पढ़े - IRCTC पर गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ क्यों नहीं? दिल्ली HC ने रेलवे से मांगा जवाब
इसी बिंदु पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस से सवाल किया। अदालत ने कहा कि यदि अधिक लोगों के आने की आशंका है तो प्रदर्शन की अनुमति देते समय शर्तें लगाई जा सकती हैं। अदालत के अनुसार, प्रदर्शनकारी कुछ घंटों के लिए निर्धारित स्थान पर रहने वाले हैं और वहां से आगे जाने का प्रस्ताव नहीं है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान पुलिस के सामने यह सवाल रखा कि यदि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए शर्तें लगाई जा सकती हैं, तो फिर पूरी तरह अनुमति से इनकार क्यों किया गया।
यह खबर भी पढ़े - दिल्ली: AAP पार्षद विजय कुमार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज
अदालत ने यह भी पूछा कि यदि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती तो क्या किसी दूसरे स्थान का सुझाव देकर वहां प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य से प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करने को कहा।
दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि निर्णय प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए जारी विभिन्न दिशा-निर्देशों और पुलिस के स्थायी आदेशों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने जंतर-मंतर को संवेदनशील क्षेत्र बताते हुए कहा कि केवल इस प्रदर्शन के मामले में अनुमति नहीं रोकी गई है, बल्कि अन्य मामलों में भी इसी तरह के फैसले लिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि प्रस्तावित प्रदर्शन के बारे में सोशल मीडिया पर काफी प्रसार हुआ है। पुलिस की ओर से आशंका जताई गई कि इससे निर्धारित संख्या से अधिक लोग मौके पर पहुंच सकते हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि सोशल मीडिया पर किसी कार्यक्रम को देखने या उसके बारे में जानकारी फैलने का मतलब यह नहीं है कि उतनी संख्या में लोग जंतर-मंतर पर पहुंचेंगे। याचिकाकर्ता के पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस के पास इलाके को नियंत्रित करने की व्यवस्था है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या जंतर-मंतर के बजाय किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने कहा कि यदि जंतर-मंतर पर अनुमति नहीं दी जा सकती तो कोई वैकल्पिक स्थान सुझाया जा सकता है। दिल्ली पुलिस की ओर से इस संभावना पर विचार किए जाने की बात कही गई। इसके बाद अदालत ने मामले को मंगलवार को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
यह मामला 20 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से संबंधित है। डॉ. राज शेखावत ने दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत जंतर-मंतर पर यूजीसी के 2026 के नए नियमों के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति से इनकार किया गया।
इससे पहले सितंबर की शुरुआत में हाईकोर्ट ने शेखावत को संशोधित तारीख के साथ दिल्ली पुलिस के समक्ष नया आवेदन देने को कहा था। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया था कि आवेदन पर नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाए और आवश्यकता होने पर कानून के तहत उचित शर्तें लगाई जा सकती हैं। उस समय प्रदर्शन के लिए 20 सितंबर की तारीख और सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक का समय बताया गया था।
इस मामले में 16 सितंबर को भी दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यवाही हुई थी। उस दिन मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया गया था। अदालत ने याचिका में मौजूद कमियों को दूर करने के बाद उसे सूचीबद्ध करने की बात कही थी।
उस सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि 20 सितंबर के प्रदर्शन के लिए पहले अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में दिल्ली पुलिस ने सूचित किया कि उस तारीख को प्रदर्शन नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा था कि 20 सितंबर की प्रस्तावित तारीख से पहले मामले की सुनवाई की आवश्यकता है।
प्रस्तावित प्रदर्शन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने’ से संबंधित 2026 के नियमों के खिलाफ है। याचिकाकर्ता इन नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
इन नियमों को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने और परिसरों में जातिगत भेदभाव से जुड़े मामलों से निपटने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। वहीं, इन नियमों को लेकर कुछ वर्गों की ओर से आपत्ति भी जताई गई है। ऐसे वर्गों की ओर से आरोप लगाया गया है कि नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव कर सकते हैं। यह आरोप याचिकाकर्ता और विरोध करने वाले कुछ वर्गों से जुड़ा पक्ष है, न कि अदालत द्वारा तय तथ्य।
डॉ. राज शेखावत की ओर से अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसके तहत 2026 के नियमों को फिलहाल प्रभावी होने से रोका गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया नियमों के कुछ प्रावधानों में अस्पष्टता और उनके संभावित दुरुपयोग की संभावना का उल्लेख किया था।
शेखावत ने इसी पृष्ठभूमि में प्रस्तावित प्रदर्शन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के रूप में आयोजित करने की अनुमति मांगी है। उनका मामला दिल्ली हाईकोर्ट में डॉ. राज शेखावत बनाम राज्य के नाम से सूचीबद्ध है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित मामले पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट के सामने आते रहे हैं। दिसंबर 2023 में एक मामले में दिल्ली सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन निर्धारित दिशा-निर्देशों और स्थायी आदेश के अधीन किए जा सकते हैं। इन दिशा-निर्देशों में प्रदर्शन को नियंत्रित तरीके से आयोजित करने तथा सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और आसपास के क्षेत्र को ध्यान में रखने की व्यवस्था का उल्लेख था।
2026 में भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े कई मामले हाईकोर्ट के सामने आए हैं। अगस्त में एक अन्य मामले में अदालत ने कहा था कि किसी प्रदर्शन में भाग लेना कानून के अनुसार होना चाहिए। उस मामले में भी डॉ. राज शेखावत का नाम याचिकाकर्ता के रूप में सामने आया था।
Explore Related Topics
टिप्पणियाँ
टिप्पणी करने के लिए लॉगिन करें