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यूपी में पंचायत सहायकों का मानदेय 50% बढ़ा

57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलेगा लाभ; डीबीटी से खाते में आएगा मानदेय, सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाओं का भी फैसला
Bureau
Bureau News Desk
17 Sep 2026
04:12 PM
1 min read
यूपी में पंचायत सहायकों का मानदेय 50% बढ़ा
हाइलाइट्स
उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों का मानदेय 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला।
मानदेय में 3 हजार रुपये यानी 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।
57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को इसका लाभ मिलने की बात कही गई है।
कैबिनेट की स्वीकृति के बाद डीबीटी के जरिए मानदेय सीधे बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था लागू की जाएगी।

लखनऊ, 16 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों के मानदेय में बढ़ोतरी करने का फैसला किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर लिए गए फैसले की जानकारी के अनुसार पंचायत सहायकों को अब 6 हजार रुपये के बजाय 9 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इस तरह मौजूदा मानदेय में 3 हजार रुपये की वृद्धि होगी, जो 50 प्रतिशत है। इस फैसले का लाभ प्रदेश के 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को मिलने की बात कही गई है।

मानदेय बढ़ाने के साथ पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा, उपचार के लिए कैशलेस सुविधा और महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश देने से जुड़े फैसलों की भी जानकारी दी गई है। इसके अलावा आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और कार्रवाई में हटाए गए पंचायत सहायकों की बहाली की बात भी कही गई है।

उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों को वर्तमान में 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। अब इसे बढ़ाकर 9 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला किया गया है। यानी प्रत्येक पंचायत सहायक के मासिक मानदेय में 3 हजार रुपये की वृद्धि होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदेश में 57 हजार से अधिक पंचायत सहायक इस व्यवस्था से लाभान्वित होंगे। मानदेय में वृद्धि को 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के तौर पर बताया गया है।

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पंचायत सहायकों के मानदेय के भुगतान की व्यवस्था में भी बदलाव किया जाना है। अभी मानदेय राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि के माध्यम से दिया जाता है।अब कैबिनेट से स्वीकृति लेने के बाद प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है। इसके बाद 9 हजार रुपये का मानदेय सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य मानदेय के भुगतान को सीधे लाभार्थी के बैंक खाते से जोड़ना है। हालांकि नई भुगतान व्यवस्था को लागू करने के लिए कैबिनेट की स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जानी है। इसलिए 9 हजार रुपये के संशोधित मानदेय की घोषणा और डीबीटी व्यवस्था के क्रियान्वयन को अलग-अलग चरणों में देखा जाना है।

मानदेय के अलावा पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी फैसला बताया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव अपने स्तर से किसी पंचायत सहायक को नहीं हटा सकेंगे। किसी पंचायत सहायक को सेवा से हटाने से संबंधित मामले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी फैसला करेगी। इससे पंचायत सहायकों को हटाने की प्रक्रिया को निर्धारित समिति के स्तर से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। यह फैसला पंचायत सहायकों की उन मांगों में शामिल था, जिनको लेकर प्रतिनिधियों की ओर से सरकार के समक्ष मुद्दे उठाए जा रहे थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सेवा सुरक्षा के मामले में अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव को अकेले निर्णय लेने का अधिकार नहीं होगा।

पंचायत सहायकों के आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर भी सरकार की ओर से निर्णय की जानकारी दी गई है। आंदोलन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लेने की बात कही गई है। इसके अलावा आंदोलन के दौरान कार्रवाई के चलते जिन पंचायत सहायकों को हटाया गया था, उन्हें दोबारा बहाल करने की भी जानकारी दी गई है। मुकदमों की वापसी और हटाए गए पंचायत सहायकों की बहाली का फैसला आंदोलन से जुड़े कर्मचारियों की मांगों के संदर्भ में बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इन फैसलों के क्रियान्वयन की अलग-अलग प्रक्रिया या समयसीमा का विस्तृत उल्लेख नहीं है।

सरकार की ओर से महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश की सुविधा देने का भी फैसला बताया गया है। मातृत्व अवकाश के अलावा पंचायत सहायकों के लिए उपचार से जुड़ी कैशलेस सुविधा देने की जानकारी भी सामने आई है। इस तरह घोषित फैसलों में मानदेय के साथ सेवा और स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं भी शामिल हैं।

पंचायत सहायकों को उपचार के लिए कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराने का फैसला भी बताया गया है। इसका उल्लेख मानदेय बढ़ोतरी के साथ घोषित अन्य सुविधाओं में किया गया है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में कैशलेस उपचार की सुविधा के तहत अस्पतालों, पात्रता, कवरेज या प्रक्रिया का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इन पहलुओं से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश सामने आने के बाद सुविधा की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत के बाद पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पंचायत सहायकों के प्रतिनिधियों से वार्ता की। इसके बाद प्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, जिसमें पंचायत सहायकों से जुड़े फैसलों की जानकारी दी गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रतिनिधियों को सरकार के स्तर पर लिए गए फैसलों से अवगत कराया गया।

पंचायत सहायक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना दे रहे थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आंदोलन सात सितंबर से चल रहा था। पंचायती राज मंत्री के साथ वार्ता और मुख्यमंत्री के स्तर पर लिए गए फैसलों की जानकारी मिलने के बाद पंचायत सहायकों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। इससे पहले पंचायत सहायकों की ओर से मानदेय बढ़ाने, सेवा सुरक्षा सहित विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा था। सरकार और प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद मानदेय, सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से जुड़े फैसलों की जानकारी सामने आई।

पंचायत सहायकों का मुद्दा मुख्य रूप से मानदेय, सेवा सुरक्षा और सेवा से जुड़ी सुविधाओं को लेकर रहा है। मौजूदा व्यवस्था में उन्हें 6 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था। अब इसे 9 हजार रुपये करने का फैसला बताया गया है। सेवा सुरक्षा के संबंध में अब ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के स्तर पर सीधे हटाने की व्यवस्था के बजाय जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी के जरिए फैसला किए जाने की बात कही गई है। इसी के साथ महिला पंचायत सहायकों के लिए मातृत्व अवकाश, उपचार के लिए कैशलेस सुविधा, आंदोलन से जुड़े मुकदमों की वापसी और हटाए गए सहायकों की बहाली जैसे मुद्दे भी घोषित फैसलों में शामिल हैं।

आगे क्या होगा?

मानदेय को 9 हजार रुपये करने और डीबीटी के जरिए भुगतान की व्यवस्था लागू करने के लिए कैबिनेट की स्वीकृति ली जानी है। इसलिए घोषित निर्णय के बाद अगला चरण औपचारिक स्वीकृति और संबंधित व्यवस्था लागू करने का होगा। वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के अनुसार 57 हजार से अधिक पंचायत सहायकों को संशोधित मानदेय का लाभ मिलेगा। सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से संबंधित विस्तृत नियम या कार्यप्रणाली जारी होने पर उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया और स्पष्ट होगी।

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