दिल्ली कार ब्लास्ट के 24 घंटे बाद भी क्यों नहीं सुलझी गुत्थी, फिदायीन हमला या मॉड्यूल का हिस्सा ?

NDV Today Explainer: लालकिले के पास हुई दिल दहला देने वाली कार ब्लास्ट घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, लेकिन 24 घंटे बाद भी कई सवाल बिना जवाब के हैं। क्या यह आत्मघाती हमला था, या भारत की राजधानी में किसी और बड़े हमले का रिहर्सल?
News Desk 11 Nov 2025, 06:45 PM 1 min read
दिल्ली कार ब्लास्ट के 24 घंटे बाद भी क्यों नहीं सुलझी गुत्थी, फिदायीन हमला या मॉड्यूल का हिस्सा ?


>देश की राजधानी में i20 कार ब्लास्ट को 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन जांच अभी भी पहेली सुलझाने में जुटी है। कार में धमाका इतना भयावह था कि आसपास की गाड़ियाँ जल गईं, खिड़कियों के शीशे चटक गए और मौके से मानव अवशेष तक मिले—फिर भी सड़क पर गड्ढा नहीं बना। क्या यह तकनीकी विस्फोट था? या किसी बड़े आतंकवादी नेटवर्क की तैयारी?


>गृह मंत्री अमित शाह ने मामले की जांच NIA को सौंप दी है। जांच में UAPA, Explosives Act जैसी धाराएं लगाई गई हैं इससे सवाल उठता है कि क्या यह फिदायीन हमला था? और क्या दिल्ली के दिल में कोई बड़ा खेल खेला जा रहा है?


>NDV Today आपके लिए इस घटना से जुड़े 5 सबसे अहम सवालों का विश्लेषण लेकर आया है।


>पहला सवाल यह उठता है कि क्या यह फिदायीन हमला था?


>शुरुआती जांच में दिल्ली पुलिस ने इस विस्फोट मामले में UAPA की धारा 16 और 18 लगाई हैं, जो आतंकवादी गतिविधियों और उनकी साजिश से जुड़ी हैं। यह संकेत देता है कि जांच एजेंसियाँ इसको आत्मघाती हमले की दिशा में भी देख रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कार में मौजूद युवक, जिसकी पहचान पुलवामा के डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी के रूप में की जा रही है, ने अपने आप को उड़ा लिया। हालांकि, सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, जबकि फिदायीन हमलों में आमतौर पर ऐसा तुरंत होता है। इसलिए इस एंगल पर अभी पूरी पुष्टि नहीं की जा सकती।


>दूसरा बड़ा सवाल यह है कि इतनी भीषण धमाके में भी सड़क पर गड्ढा क्यों नहीं बना?


>विस्फोट ने आसपास खड़ी छह गाड़ियों और तीन ऑटो रिक्शाओं को जलाकर खाक कर दिया, लालकिला मेट्रो स्टेशन तक की शीशे टूट गए, लेकिन सड़क पर क्रेटर नहीं दिखा। यह पारंपरिक IED या उच्च क्षमता वाले विस्फोटक जैसा नहीं लगता। प्रारंभिक जांच और विस्फोट विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, यह विस्फोट मुख्यतः कार के अंदर केंद्रित था, जिसकी ऊर्जा ऊपर और चारों तरफ फैल गई, नीचे नहीं। ऐसा विस्फोट तब होता है जब उपयोग किया गया मिश्रण, जैसे अमोनियम नाइट्रेट और फ्यूल, तेजी से ऊपर की दिशा में दबाव छोड़ता है। यही वजह है कि सड़क पर बड़ा गड्ढा नहीं बना और शार्पनेल जैसा कोई धातु सामग्री भी नहीं मिली, जैसा आमतौर पर संगठित आतंकी हमलों में देखा जाता है।


>तीसरा प्रश्न यह है कि क्या यह धमाका फरीदाबाद में पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा है?


>इस मामले में संदिग्ध कार चालक उमर नबी का नाम सामने आया है, और आशंका है कि उसने हरियाणा में पकड़े गए आतंकियों के मॉड्यूल के खुलासे के बाद जल्दबाजी में खुद को उड़ाया। फरीदाबाद में कुछ घंटे पहले ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन डॉक्टरों सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया था और उनके पास से 2,900 किलो विस्फोटक तथा हथियार मिले थे। पूर्व DGP एसपी वैद ने कहा है कि मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद उमर ने खुद को आत्मघाती हमले में झोंक दिया होगा। यह घटना दर्शाती है कि यह नेटवर्क काफी लंबे समय से सक्रिय था और संभव है कि जैश जैसे आतंकी संगठन और ISI इसका संचालन कर रहे हों।


>चौथा सवाल यह है कि क्या धमाके की पहले धमकी थी?


>हाल के महीनों में जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन की ओर से भारत पर बड़े हमले की चेतावनियाँ मिल चुकी थीं। सितंबर में जैश के वरिष्ठ कमांडर ने ऑपरेशन सिंदूर का बदला लेने की धमकी दी थी और अक्टूबर में PoK में हाई लेवल मीटिंग की सूचना भी मिली थी। इसके अलावा, यूपी ATS द्वारा सहारनपुर से अल-कायदा लिंक वाले व्यक्ति की गिरफ्तारी और गुजरात में हथियारों के साथ एक डॉक्टर की गिरफ्तारी ने भी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई थी। इन घटनाओं का क्रम बताता है कि आतंकी गतिविधियाँ और तैयारियाँ चल रही थीं।


>अंतिम सवाल यह कि क्या यह ब्लास्ट गलती से समय से पहले हो गया और असली लक्ष्य कुछ और था?


>CCTV फुटेज दिखाता है कि कार कई घंटों तक पार्किंग में खड़ी रही और जैसे ही वह सड़क पर चली, सिग्नल के ठीक पहले धमाका हो गया। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि हमलावर किसी भीड़भाड़ वाले स्थान या महत्वपूर्ण लक्ष्य की ओर बढ़ रहा था और विस्फोट अनियंत्रित रूप से पहले हो गया। लेकिन अभी जांच के शुरुआती चरण में होने के कारण इस पर निश्चित राय देना मुश्किल है।


>फिलहाल NIA, स्पेशल सेल और IB सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं। DNA टेस्ट, विस्फोटक की फॉरेंसिक रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक डेटा एनालिसिस इस केस की दिशा तय करेंगे। लेकिन एक बात साफ है दिल्ली में हुआ यह धमाका सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि संभावित बड़े खतरे की चेतावनी है। एजेंसियों की चुनौती है कि इस नेटवर्क को पूरी तरह बेनकाब कर भविष्य के हमलों को रोका जाए।


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