>गोरक्षपीठ की नारी सशक्तिकरण की परंपरा अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मिशन शक्ति के जरिए पूरे प्रदेश में व्यापक रूप ले चुकी है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन 22 सितंबर 2025 को मिशन शक्ति का पांचवा चरण शुरू होने जा रहा है, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और सशक्तिकरण को केंद्र में रखा जाएगा।
>गोरक्षपीठ के शैक्षिक प्रकल्प “महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद” से जुड़ी महिलाएं स्कूल, कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और हॉस्टल में न सिर्फ शिक्षा ग्रहण कर रही हैं, बल्कि अपने हुनर को निखारने की ट्रेनिंग भी ले रही हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने इस परंपरा को अपने प्रशासनिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वावलंबन के लिए मिशन शक्ति की शुरुआत की।
>पांच साल पहले देवीपाटन शक्तिपीठ से शुरू हुआ यह मिशन, नारी सुरक्षा और स्वावलंबन को प्राथमिकता देता आया है। योगी-1.0 के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एंटी रोमियो स्क्वाड की स्थापना की गई थी। बाद में इसे मिशन शक्ति के तहत व्यापक रूप दिया गया, जिससे महिलाओं के लिए सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन भी सुनिश्चित हो सके।
>भारतीय सभ्यता में नारी सम्मान की परंपरा सदियों पुरानी है। डबल इंजन सरकार (मोदी और योगी) ने इस परंपरा को आधुनिक रूप देते हुए महिलाओं के लिए कई योजनाओं को कार्यान्वित किया है। इनमें स्वयं सहायता समूह, निराश्रित महिला पेंशन, कन्या सुमंगला योजना, किसान सखी और बैंक सखी शामिल हैं। मुख्यमंत्री खुद कन्याओं का पांव धोकर उन्हें भोजन कराते और दक्षिणा देकर विदा करते हैं, जो महिलाओं के प्रति सम्मान का प्रत्यक्ष संदेश है।
>शिक्षा और स्वावलंबन पर भी पीठ का विशेष ध्यान है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के महिला और बालिका संस्थान पूरे पूर्वांचल में शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। इन संस्थानों में महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज, महाराणा प्रताप महिला पीजी कॉलेज, योगिराज बाबा गम्भीरनाथ सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र जैसी संस्थाएं शामिल हैं, जो प्रतिवर्ष हजारों बालिकाओं को अपने जीवन में आगे बढ़ने का अवसर देती हैं।
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिबद्धता और गोरक्षपीठ की परंपरा के संयोजन से मिशन शक्ति ने उत्तर प्रदेश में नारी सशक्तिकरण को एक नई दिशा और गति दी है, जिससे महिलाएं अब शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ रही हैं।
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