>कभी जंगलों में बसे और सरकारी अभिलेखों से गुमनाम रहे वनटांगिया गांवों की पहचान आज बदल चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और संवेदनशील नेतृत्व ने गोरखपुर के इन गांवों का कायाकल्प कर दिया है। जो गांव कभी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे, वे आज राजस्व ग्राम बनकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।
>गोरखपुर के घने जंगलों में बसे वनटांगिया गांवों को कभी सरकारी योजनाओं में शामिल नहीं किया जाता था। लेकिन वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। उन्होंने तिकोनिया नंबर 3 समेत सभी वनटांगिया गांवों को राजस्व ग्राम घोषित किया और यहीं से शुरू हुआ विकास का नया अध्याय।
>राजस्व ग्राम घोषित होते ही इन गांवों में शासन की योजनाओं की बौछार हो गई। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 440 परिवारों को पक्के घर मिले, जबकि लगभग हर घर को पाइपलाइन से पेयजल की सुविधा दी गई। गांव में 100% विद्युतीकरण हुआ, सड़कों पर खड़ंजा और इंटरलॉकिंग बिछाई गई जिससे आवागमन आसान हो गया।
>शिक्षा के क्षेत्र में भी सीएम योगी का विजन साफ दिखाई देता है। गांव में गोरक्षनाथ विद्यापीठ और एक जूनियर हाईस्कूल (कंपोजिट विद्यालय) की स्थापना की गई, जिससे यहां के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है गांव के 1501 लोग आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के निःशुल्क चिकित्सा कवरेज से जुड़ चुके हैं।
>वनटांगिया गांवों में अब उज्ज्वला योजना, पेंशन योजनाएं (वृद्धा, विधवा, दिव्यांग), कन्या सुमंगला योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुँच चुका है। अब तक 53 किसान किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं और बाकी को भी इससे जोड़ने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिर्फ योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहे वे हर साल दीपावली के मौके पर खुद वनटांगिया गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों के साथ उत्सव मनाते हैं। यह परंपरा न सिर्फ शासन की पहुंच को दर्शाती है, बल्कि मुख्यमंत्री की ‘जनसेवा केंद्रित राजनीति’ की मिसाल भी बन चुकी है।
>आज गोरखपुर के वनटांगिया गांव न केवल प्रदेश के लिए बल्कि पूरे देश के लिए ‘योगी मॉडल ऑफ इनक्लूसिव डेवलपमेंट’ की मिसाल बन चुके हैं।
जहाँ कभी अंधकार था, वहाँ अब उजाला है और जहाँ उपेक्षा थी, वहाँ अब अवसर हैं।
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