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यूपी के हर कॉलेज में बनेगा मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष, छात्रों को मिलेगी काउंसलिंग

योगी सरकार सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए समान छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति तैयार कर रही है, जिसमें काउंसलिंग, हेल्पलाइन और विशेषज्ञ सेवाओं की व्यवस्था का प्रस्ताव है।
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Bureau News Desk
08 Sep 2026
01:59 PM
1 min read
यूपी के हर कॉलेज में बनेगा मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष, छात्रों को मिलेगी काउंसलिंग
हाइलाइट्स
उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए समान छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति तैयार की जाएगी।
हर उच्च शिक्षण संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष स्थापित करने का प्रस्ताव है।
छात्रों को काउंसलिंग और जरूरत के अनुसार मनोवैज्ञानिक व अन्य विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था होगी।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी शुरुआती संकेत पहचानने के लिए शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और छात्र प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देने की योजना है।

उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को लेकर राज्य सरकार एक समान नीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए प्रस्तावित 'छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति' के तहत प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में 'मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष' स्थापित करने की योजना है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य पढ़ाई के दबाव, परीक्षा की चिंता, करियर से जुड़े तनाव और भावनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे विद्यार्थियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित नीति में काउंसलिंग के साथ जरूरत के अनुसार मनोवैज्ञानिक और अन्य विशेषज्ञ सेवाओं तक विद्यार्थियों की पहुंच सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल है।

प्रस्तावित नीति और उसके क्रियान्वयन की कार्ययोजना को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में नीति के विभिन्न पहलुओं, उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार और विद्यार्थियों को समय पर परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर चर्चा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा एम.पी. अग्रवाल, विशेष सचिव निधि श्रीवास्तव सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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प्रस्तावित नीति का प्रमुख प्रावधान प्रत्येक विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष स्थापित करना है। इन कक्षों के माध्यम से विद्यार्थियों को सुरक्षित और गोपनीय वातावरण में काउंसलिंग उपलब्ध कराने की योजना है। जरूरत के आधार पर विद्यार्थियों को काउंसलर, मनोवैज्ञानिक अथवा अन्य विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़े जाने का भी प्रस्ताव है। इससे उन विद्यार्थियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए संस्थागत व्यवस्था तैयार करने की योजना है, जो पढ़ाई या अन्य कारणों से तनाव और भावनात्मक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

प्रस्तावित नीति में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को केवल काउंसलिंग तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें पढ़ाई के दबाव, परीक्षा की चिंता, करियर को लेकर तनाव और भावनात्मक परेशानियों की शुरुआती पहचान और सहायता पर जोर दिया गया है। राज्य से लेकर जिला और संस्थान स्तर तक मानसिक स्वास्थ्य सहायता की समन्वित व्यवस्था विकसित करने की योजना है। विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार उन्हें काउंसलिंग और विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच दिलाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर व्यवस्था तैयार की जाएगी।

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नीति के क्रियान्वयन के लिए निदेशक, उच्च शिक्षा को राज्य स्तर पर नोडल एवं कार्यान्वयन प्राधिकारी बनाए जाने का प्रस्ताव है। वहीं प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में संचालन समिति नीति के क्रियान्वयन, बजट और नियमित समीक्षा की निगरानी करेगी। जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित करने की योजना है। यह समिति जिले के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ समन्वय करेगी और मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़ी गतिविधियों के संचालन तथा निगरानी में भूमिका निभाएगी।

प्रस्तावित व्यवस्था में ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य पोर्टल विकसित करने की भी योजना है। इसके जरिए विद्यार्थियों के लिए प्रारंभिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। पोर्टल और संस्थागत सहायता व्यवस्था के माध्यम से जरूरत वाले विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें उपयुक्त सहायता से जोड़ने की योजना है। गंभीर तनाव या आपात स्थिति में तत्काल मदद के लिए हेल्पलाइन और रेफरल व्यवस्था विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की शुरुआती पहचान में शिक्षकों और संस्थान से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका तय करने की योजना है। इसके तहत शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और छात्र प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है। प्रशिक्षण में तनाव, भावनात्मक परेशानी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकेतों को समझने तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाने से संबंधित जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा प्रशिक्षित शिक्षक छोटे समूहों में विद्यार्थियों के साथ मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और जीवन कौशल से जुड़े संवाद कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे।

प्रस्तावित नीति में मानसिक स्वास्थ्य सहायता लेते समय विद्यार्थियों की गोपनीयता और गरिमा को प्राथमिकता देने की व्यवस्था का उल्लेख है। सहायता कक्ष में विद्यार्थियों को सुरक्षित और गोपनीय वातावरण में काउंसलिंग उपलब्ध कराने की योजना है। गंभीर तनाव अथवा आपात स्थिति में हेल्पलाइन और रेफरल व्यवस्था के माध्यम से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित नीति में मानसिक स्वास्थ्य को विद्यार्थियों के समग्र विकास से जोड़ने की योजना है। इसके तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान और कार्यशालाएं आयोजित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और करियर काउंसलिंग को बढ़ावा देने की योजना भी नीति में शामिल है। सोशल मीडिया के माध्यम से सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित संदेश और जागरूकता सामग्री विद्यार्थियों तक पहुंचाने का भी प्रस्ताव है।

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के लिए उच्च शिक्षा विभाग में समेकित पोर्टल और डैशबोर्ड विकसित करने की योजना है। इसके माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में संचालित मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों, सहायता व्यवस्था और प्रगति की निगरानी की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न स्तरों पर चल रही गतिविधियों और सहायता तंत्र की जानकारी को एक समेकित प्रणाली में उपलब्ध कराना है।

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