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लखनऊ में डीएल टेस्ट का बदला नियम, दोपहिया चालकों को 90 सेकंड में पार करना होगा ट्रैक

14 सितंबर से नई व्यवस्था के तहत दोपहिया के लिए 90 सेकंड और चार पहिया वाहन के लिए 3.82 मिनट की समय-सीमा तय की गई है।
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Bureau News Desk
08 Sep 2026
02:18 PM
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लखनऊ में डीएल टेस्ट का बदला नियम, दोपहिया चालकों को 90 सेकंड में पार करना होगा ट्रैक
हाइलाइट्स
लखनऊ में ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट की नई व्यवस्था 14 सितंबर से लागू होगी।
दोपहिया वाहन चालकों को टेस्टिंग ट्रैक 90 सेकंड में पार करना होगा।
चार पहिया वाहन के लिए ट्रैक पूरा करने की समय-सीमा 3.82 मिनट होगी।
ट्रैक पर चूक होने पर सेंसर बीप करेगा और फेल होने पर प्रशिक्षण अनिवार्य होगा।

राजधानी लखनऊ में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया 14 सितंबर से और सख्त होने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत दोपहिया वाहन चालकों को टेस्टिंग ट्रैक महज 90 सेकंड में पार करना होगा। वहीं, चार पहिया वाहन चालकों के लिए ट्रैक पूरा करने की समय-सीमा 3.82 मिनट निर्धारित की गई है।

टेस्ट में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाने और फेल होने वाले आवेदकों के लिए प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए बनाए गए स्वचालित ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं परीक्षण केंद्र में सेंसर आधारित व्यवस्था के जरिए परीक्षण किया जाएगा।

स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए स्वचालित ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र में आठ अंक के डिजाइन वाला ट्रैक बनाया गया है। इस ट्रैक पर वाहन चलाते समय किसी तरह की चूक होने पर सेंसर के जरिए बीप की आवाज आएगी। इस व्यवस्था में ड्राइविंग कौशल का परीक्षण निर्धारित ट्रैक पर किया जाएगा। आवेदक को वाहन के प्रकार के अनुसार तय समय के भीतर ट्रैक पूरा करना होगा। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह समय 90 सेकंड है, जबकि चार पहिया वाहन चालकों को 3.82 मिनट में ट्रैक पूरा करना होगा। इस तरह नए परीक्षण में केवल वाहन चलाने की क्षमता ही नहीं, बल्कि निर्धारित ट्रैक को तय समय के भीतर पूरा करना भी प्रक्रिया का हिस्सा होगा।

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नई व्यवस्था में टेस्ट में असफल रहने वाले आवेदकों के लिए प्रशिक्षण लेना अनिवार्य किया गया है। यानी टेस्ट में निर्धारित मानकों के अनुसार प्रदर्शन नहीं करने वाले आवेदक को आगे की प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा। स्वचालित परीक्षण व्यवस्था में ट्रैक पर होने वाली चूक को सेंसर के माध्यम से दर्ज किया जाएगा। आठ अंक के डिजाइन वाले ट्रैक पर वाहन चलाते समय सेंसर की प्रतिक्रिया के आधार पर परीक्षण प्रक्रिया पूरी होगी।

लखनऊ में पहला निजी ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग सेंटर उदेत खेड़ा मौंदा में बनाया गया है। इस केंद्र का उद्घाटन 30 जून को परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने किया था। उद्घाटन के बाद केंद्र पर टेस्टिंग की व्यवस्था शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन शुरुआती क्षमता सीमित होने के कारण इसका संचालन दो महीने में शुरू नहीं हो सका। केंद्र पर पहले प्रतिदिन करीब 150 लोगों के टेस्ट की क्षमता थी। अब इस क्षमता को बढ़ाकर प्रतिदिन 250 से 300 आवेदकों तक किया गया है। क्षमता बढ़ाए जाने के बाद अधिक आवेदकों के परीक्षण की व्यवस्था की गई है।

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नई प्रक्रिया में स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक करने वाले आवेदकों को पहले संबंधित एआरटीओ कार्यालय जाना होगा। इसके लिए उन्हें ट्रांसपोर्ट नगर या देवा रोड एआरटीओ कार्यालय जाना होगा। एआरटीओ कार्यालय में आवेदन की जांच यानी स्क्रूटनी और बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद आवेदक को ड्राइविंग टेस्ट के लिए उदेत खेड़ा मौंदा स्थित केंद्र जाना होगा। इस प्रक्रिया में ऑनलाइन स्लॉट बुक कराने के बाद सीधे टेस्टिंग ट्रैक पर पहुंचने के बजाय पहले आवेदन संबंधी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

उदेत खेड़ा मौंदा स्थित ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं परीक्षण केंद्र ट्रांसपोर्ट नगर से नादरगंज औद्योगिक क्षेत्र के रास्ते पहुंचा जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ट्रांसपोर्ट नगर से केंद्र की दूरी करीब 12 किलोमीटर है। वहीं, कानपुर रोड से किसान पथ के रास्ते यह दूरी करीब 20 किलोमीटर बताई गई है। इसलिए एआरटीओ कार्यालय में स्क्रूटनी और बायोमीट्रिक कराने के बाद आवेदकों को टेस्टिंग केंद्र तक पहुंचना होगा। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोगों के लिए इस प्रक्रिया में एआरटीओ कार्यालय और टेस्टिंग केंद्र, दोनों स्थानों पर जाना प्रक्रिया का हिस्सा रहेगा।

नई व्यवस्था 14 सितंबर से लागू होगी। इसके बाद स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए होने वाले परीक्षण में दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए अलग-अलग समय-सीमा लागू होगी। दोपहिया वाहन चालकों को 90 सेकंड में आठ अंक वाले ट्रैक को पार करना होगा। चार पहिया वाहन चालकों के लिए निर्धारित समय 3.82 मिनट रहेगा।

टेस्ट के दौरान ट्रैक पर चूक होने पर सेंसर बीप करेगा। टेस्ट में असफल होने वाले आवेदकों के लिए प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर की क्षमता में भी बदलाव किया गया है। पहले यहां प्रतिदिन 150 लोगों के परीक्षण की क्षमता थी। अब इसे बढ़ाकर 250 से 300 लोगों तक किया गया है। क्षमता बढ़ाए जाने के बाद केंद्र पर पहले की तुलना में अधिक आवेदकों का परीक्षण किया जा सकेगा। यह बदलाव स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने वाले आवेदकों की प्रक्रिया से जुड़ा है।

स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदक को पहले ऑनलाइन स्लॉट बुक करना होगा। इसके बाद उसे ट्रांसपोर्ट नगर या देवा रोड एआरटीओ कार्यालय जाना होगा। एआरटीओ कार्यालय में आवेदन की स्क्रूटनी और बायोमीट्रिक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदक को उदेत खेड़ा मौंदा स्थित स्वचालित ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं परीक्षण केंद्र जाना होगा। टेस्टिंग सेंटर में वाहन के अनुसार निर्धारित ट्रैक पर परीक्षण होगा। दोपहिया के लिए 90 सेकंड और चार पहिया के लिए 3.82 मिनट की समय-सीमा रहेगी। ट्रैक पर चूक होने पर सेंसर बीप करेगा। टेस्ट में फेल होने पर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।

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