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अब स्टार्टअप शुरू करना होगा आसान! यूपी सरकार देगी 15 लाख तक सीड फंडिंग, एआई और डीप-टेक को मिलेगा बड़ा सहारा

कैबिनेट ने मंजूर की उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026, 100 करोड़ तक पेशेंस कैपिटल, 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और स्टार्टअप मिशन को भी हरी झंडी
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Bureau News Desk
06 Jul 2026
07:22 PM
1 min read
अब स्टार्टअप शुरू करना होगा आसान! यूपी सरकार देगी 15 लाख तक सीड फंडिंग, एआई और डीप-टेक को मिलेगा बड़ा सहारा
हाइलाइट्स
यूपी कैबिनेट ने स्टार्टअप नीति-2026 और स्टार्टअप मिशन को मंजूरी दी।
सीड फंडिंग 15 लाख रुपये और विशेष परिस्थितियों में 50 लाख रुपये तक मिलेगी।
डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल का प्रावधान।
प्रदेश में 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और डीप-टेक यू-हब स्थापित किए जाएंगे।

लखनऊ, 6 जुलाई। उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं, नवाचार आधारित कंपनियों और तकनीकी उद्यमों के लिए सरकार ने नई प्रोत्साहन नीति को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को स्वीकृति प्रदान की गई। नई नीति के तहत स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक वित्तीय सहायता, संस्थागत सहयोग और तकनीकी समर्थन देने के कई प्रावधान किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना, युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख स्टार्टअप केंद्रों में शामिल करना है।

नई स्टार्टअप नीति में शुरुआती चरण के उद्यमों के लिए आर्थिक सहायता बढ़ाई गई है। पहले जहां सीड फंडिंग की सीमा 7.5 लाख रुपये थी, उसे बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकेगी।

इसके अलावा प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए मिलने वाला अनुदान 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं स्टार्टअप शुरू करने वाले उद्यमियों को मिलने वाला सस्टेनेंस अलाउंस भी बढ़ाया गया है। अब पात्र स्टार्टअप्स को 20 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से दो वर्ष तक भरण-पोषण भत्ता मिलेगा, जबकि पहले यह राशि 17,500 रुपये प्रतिमाह एक वर्ष के लिए निर्धारित थी।

नई नीति में एआई, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक और एग्रीटेक जैसे उभरते क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

इन क्षेत्रों में कार्य करने वाले डीप-टेक स्टार्टअप्स को सामान्य स्टार्टअप्स की तुलना में अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत 20 लाख रुपये तक प्रोटोटाइप सहायता, 30 लाख रुपये तक सीड फंडिंग, 100 करोड़ रुपये तक पेशेंस कैपिटल और अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए 40 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।

नई नीति में स्टार्टअप्स की शुरुआती वित्तीय चुनौतियों को कम करने के उद्देश्य से कई अतिरिक्त प्रोत्साहन भी शामिल किए गए हैं। सरकार पेटेंट और गुणवत्ता प्रमाणन पर होने वाले खर्च की 2 करोड़ रुपये तक प्रतिपूर्ति करेगी। इसके अलावा 5 करोड़ रुपये तक की मैचिंग ग्रांट, 2 करोड़ रुपये तक के टर्म लोन पर 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी तथा कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) अंशदान की प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान किया गया है। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य नवाचार आधारित उद्यमों को शुरुआती वर्षों में वित्तीय स्थिरता प्रदान करना है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए इन्क्यूबेशन केंद्रों के लिए भी सहायता बढ़ाई गई है। नई नीति के तहत पूंजीगत अनुदान 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.25 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थापित इन्क्यूबेटर्स के लिए यह सहायता बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये कर दी गई है।

इसके अलावा परिचालन व्यय के लिए मिलने वाला वार्षिक अनुदान भी 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दिया गया है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले इन्क्यूबेटर्स और उनके माध्यम से निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा।

राज्य सरकार ने अत्याधुनिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन केंद्रों में एआई, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, स्पेस टेक्नोलॉजी, हेल्थटेक और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए अधिकतम वित्तीय सहायता भी 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसके साथ ही राज्य स्तरीय डीप-टेक यू-हब की स्थापना की जाएगी, जहां स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन, निवेश, उद्योग सहयोग, मेंटरशिप और अनुसंधान सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराने की योजना है।

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन की स्थापना को भी मंजूरी दे दी है। यह मिशन सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत गठित होगा और सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करेगा।

मिशन प्रदेश में स्टार्टअप, नवाचार, इन्क्यूबेशन, निवेश, मेंटरशिप, एक्सेलेरेशन कार्यक्रमों और उद्योग-शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करने वाली नोडल संस्था के रूप में काम करेगा। साथ ही योजनाओं के संचालन, निगरानी और मूल्यांकन की जिम्मेदारी भी इसी संस्था के पास होगी।

नई नीति के तहत प्रदेश में बिजनेस प्लान प्रतियोगिताएं, स्टार्टअप वीक, ग्रैंड चैलेंज, नवाचार संगोष्ठियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी नवाचार और उद्यमिता से जोड़ना है, ताकि प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति का विस्तार हो सके।

सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 17 हजार स्टार्टअप पंजीकृत हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटर्स और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य में स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना की जाएगी, जिससे स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूती मिलेगी।

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