फोटो देखकर लगती थी बोली, छह साल से सक्रिय था किशोरियों की तस्करी करने वाला गिरोह

लखनऊ में दो नाबालिगों के लापता होने की जांच में खुला नेटवर्क, राजस्थान में शादी के नाम पर किशोरियों को बेचने का आरोप।
Bureau 06 Jun 2026, 06:47 PM 1 min read
फोटो देखकर लगती थी बोली, छह साल से सक्रिय था किशोरियों की तस्करी करने वाला गिरोह

 

उत्तर प्रदेश और राजस्थान से जुड़े एक कथित अंतरराज्यीय मानव तस्करी नेटवर्क की जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच के दौरान पता चला है कि गिरोह गरीब और असहाय परिवारों की किशोरियों को निशाना बनाता था। आरोप है कि लड़कियों की तस्वीरें जुटाकर उन्हें वाट्सएप के माध्यम से राजस्थान में मौजूद नेटवर्क से जुड़े लोगों तक भेजा जाता था, जहां उनकी कथित रूप से बोली लगाई जाती थी। पुलिस के अनुसार, सौदा तय होने के बाद किशोरियों को बहला-फुसलाकर या उनके परिवारों को आर्थिक प्रलोभन देकर राजस्थान ले जाया जाता था। वहां शादी के नाम पर उन्हें बेचने का आरोप है।

 

जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क पिछले लगभग छह वर्षों से सक्रिय था। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपितों ने छह से अधिक किशोरियों की तस्करी की बात स्वीकार की है। वहीं पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए 20 से अधिक किशोरियों को राजस्थान भेजा गया हो सकता है। जानकारी के अनुसार, प्रत्येक किशोरी के बदले स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों को एक से डेढ़ लाख रुपये तक मिलते थे। सुंदर बताई जाने वाली लड़कियों का कथित सौदा ढाई लाख रुपये से शुरू होने की बात भी सामने आई है।

 

मामले का खुलासा तब हुआ जब मोहनलालगंज क्षेत्र के गनियार गांव निवासी कमलेशा ने 12 मई को अपनी 16 वर्षीय और 12 वर्षीय नातिन के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रिश्तेदारी का एक किशोर और उसकी सहयोगी दोनों बच्चियों को अपने साथ ले गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच शुरू की।

 

डीसीपी दक्षिणी के निर्देश पर चार पुलिस टीमों का गठन किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने 24 दिनों तक लगातार पड़ताल की और 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की। इसके बाद 18 मई को दोनों नाबालिगों को सकुशल बरामद कर लिया गया। पूछताछ में दोनों बच्चियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें राजस्थान ले जाने की तैयारी की जा रही थी, जहां शादी के नाम पर उनका सौदा किए जाने की आशंका थी। यहीं से जांच का दायरा बढ़ाया गया और कथित मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा होने लगा।

 

पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह पहले किशोरियों को रायबरेली ले जाता था। वहां उन्हें नए कपड़े पहनाकर उनकी तस्वीरें खींची जाती थीं। इसके बाद ये तस्वीरें राजस्थान में मौजूद नेटवर्क के लोगों को भेजी जाती थीं। कथित रूप से फोटो देखने के बाद सौदा तय किया जाता था। इसके बाद संबंधित किशोरी को राजस्थान पहुंचाया जाता था।

 

पुलिस ने अतरौली क्रासिंग के पास से रायबरेली निवासी अनुराग यादव, अख्तर, प्रिया पटेल उर्फ शीला और एक 17 वर्षीय बाल अपचारी को हिरासत में लिया है। उनकी निशानदेही पर दो चार पहिया वाहन भी बरामद किए गए हैं। पूछताछ में प्रिया पटेल ने बताया कि वर्ष 2020 में उसकी मुलाकात राजस्थान के कोटा निवासी सोनम और उसके पति भूपेंद्र चौधरी से हुई थी। इसके बाद वह उनके लिए किशोरियों की तलाश करने लगी। जांच एजेंसियों के अनुसार, सोनम और भूपेंद्र चौधरी को इस नेटवर्क का प्रमुख बताया जा रहा है। दोनों फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है।

 

पुलिस जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि रायबरेली की दो सगी बहनों को भी इसी नेटवर्क के माध्यम से राजस्थान भेजा गया था। पुलिस इस मामले की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और संभावित पीड़ितों की पहचान का प्रयास कर रही है।

 

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