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एक्सप्रेसवे धंसने का वीडियो हुआ वायरल, एनएचएआई ने प्रोजेक्ट मैनेजर समेत तीन अधिकारियों पर गिराई गाज

उन्नाव के कोरारी क्षेत्र में सड़क की ऊपरी परत धंसने का वीडियो सामने आने के बाद एनएचएआई ने जांच पूरी की। प्रोजेक्ट मैनेजर, टीम लीडर और रेसिडेंट इंजीनियर को परियोजना से हटाकर दो वर्षों तक किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में भाग लेने से रोक दिया गया।
Bureau
Bureau News Desk
29 Jul 2026
10:43 AM
1 min read
एक्सप्रेसवे धंसने का वीडियो हुआ वायरल, एनएचएआई ने प्रोजेक्ट मैनेजर समेत तीन अधिकारियों पर गिराई गाज
हाइलाइट्स
उद्घाटन के 14 दिन बाद सड़क धंसने पर एनएचएआई की बड़ी कार्रवाई।
प्रोजेक्ट मैनेजर समेत तीन अधिकारी दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट।
जांच में सड़क की ऊपरी बिटुमिनस परत में स्लिपेज की पुष्टि।
पुल की संरचना को पूरी तरह सुरक्षित बताया गया।

करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 14 दिन बाद सड़क धंसने के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। जांच के बाद निर्माण एजेंसी से जुड़े तीन अधिकारियों को परियोजना से हटाते हुए अगले दो वर्षों तक किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई उन्नाव जिले के कोरारी क्षेत्र में एक्सप्रेसवे की सड़क की ऊपरी परत धंसने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर सामने आने के बाद की गई। घटना के बाद एनएचएआई ने मौके का तकनीकी निरीक्षण कराया और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया।

एनएचएआई ने निर्माणकारी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर-सह-डीजीएम (हाइवे) विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र इंजीनियर के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार तथा रेसिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से परियोजना से हटा दिया है। साथ ही तीनों अधिकारियों को अगले दो वर्षों तक किसी भी एनएचएआई परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। इसके कुछ ही दिनों बाद उन्नाव के कोरारी क्षेत्र में किलोमीटर संख्या 64 के पास सड़क की ऊपरी सतह धंसने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो सामने आने के बाद एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे थे।

एनएचएआई के अनुसार, 26 जुलाई को नियमित रूट पेट्रोलिंग के दौरान सड़क की सतह पर स्लिपेज दिखाई दिया। सूचना मिलते ही प्राधिकरण और निर्माण एजेंसी की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया।

जांच में पाया गया कि पुल के डैक स्लैब के ऊपर बनी बिटुमिनस (डामर) परत में सीमित स्तर पर स्लिपेज हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, मानसून के दौरान लगातार यातायात का दबाव, नमी में बदलाव और ज्वाइंट्स के जरिए वर्षा जल के प्रवेश जैसी परिस्थितियों में इस तरह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

तकनीकी निरीक्षण में यह भी स्पष्ट किया गया कि समस्या केवल सड़क की ऊपरी बिटुमिनस परत तक सीमित थी। पुल की नींव, सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर पूरी तरह सुरक्षित पाए गए। जांच में किसी प्रकार की संरचनात्मक क्षति या निर्माण संबंधी तकनीकी खामी सामने नहीं आई।

एनएचएआई ने बताया कि संचालन एवं रखरखाव समझौते के तहत प्रभावित हिस्से की क्षतिग्रस्त बिटुमिनस परत हटाकर नई परत बिछा दी गई है। इसके साथ ही भविष्य में वर्षा जल के प्रवेश को रोकने के लिए ज्वाइंट्स की सीलिंग और स्थानीय जल निकासी व्यवस्था में भी आवश्यक सुधार किए गए हैं।

प्राधिकरण के अनुसार, मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। एनएचएआई का कहना है कि परियोजना की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी आगे भी जारी रहेगी।

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