डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के कार्डियोलॉजी विभाग में हार्ट फेल्योर एवं पल्मोनरी हाइपरटेंशन क्लिनिक की शुरुआत की गई है। संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी. एम. सिंह ने शनिवार को इस विशेष क्लिनिक का शुभारंभ किया।
यह क्लिनिक प्रत्येक शनिवार सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक कार्डियोलॉजी ओपीडी में संचालित होगा। इसमें हार्ट फेल्योर और पल्मोनरी हाइपरटेंशन से पीड़ित मरीजों के लिए समर्पित टीम द्वारा विस्तृत मूल्यांकन, उपचार, नियमित फॉलो-अप और आवश्यक परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। क्लिनिक का संचालन कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. आशीष झा और डॉ. मिथिलेश यादव द्वारा किया जाएगा। यहां मरीजों के लक्षणों और बीमारी की स्थिति के आधार पर उपचार एवं फॉलो-अप की योजना तैयार की जाएगी।
मरीजों के रक्तचाप, हृदय गति, वजन, सूजन और सांस फूलने की गंभीरता का मूल्यांकन किया जाएगा। जरूरत के अनुसार ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी और अन्य जांचों की भी समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही मरीजों को दवाओं के नियमित सेवन, नमक और तरल पदार्थ की मात्रा, व्यायाम, वजन की निगरानी तथा बीमारी बिगड़ने के शुरुआती संकेतों के बारे में परामर्श दिया जाएगा। क्लिनिक में दवाओं के अनुकूलन और आगे की जांच एवं उपचार योजना पर भी ध्यान दिया जाएगा।
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हार्ट फेल्योर ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता या हृदय के भीतर दबाव असामान्य रूप से बढ़ जाता है। हार्ट फेल्योर का मतलब यह नहीं है कि हृदय ने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया है। इस स्थिति के कई कारण हो सकते हैं। इनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज या पहले हो चुका हार्ट अटैक, लंबे समय से उच्च रक्तचाप, हृदय की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी, हृदय के वाल्व की बीमारी और अनियमित हृदय गति सहित कई अन्य हृदय रोग शामिल हैं।
हार्ट फेल्योर के प्रमुख लक्षणों में चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना, जल्दी थक जाना, पैरों में सूजन, रात में सांस फूलने के कारण नींद खुलना और लेटने पर सांस लेने में परेशानी शामिल हैं। अचानक वजन बढ़ना और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता में कमी भी इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय से फेफड़ों तक रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं में रक्तचाप असामान्य रूप से बढ़ जाता है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने पर हृदय के दाहिने हिस्से पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और गंभीर स्थिति में राइट हार्ट फेल्योर विकसित हो सकता है। इसके संभावित लक्षणों में मेहनत करने पर सांस फूलना, अत्यधिक थकान, चक्कर या बेहोशी, सीने में दर्द या भारीपन, तेज धड़कन, पैरों या पेट में सूजन और ऑक्सीजन का स्तर कम होना शामिल हैं। पल्मोनरी हाइपरटेंशन के कई संभावित कारण बताए गए हैं। इनमें जन्मजात हृदय रोग, हृदय के वाल्व की बीमारी, फेफड़ों से संबंधित कुछ बीमारियां और पुराने रक्त के थक्के शामिल हैं।
ऐसे मरीज इस विशेष क्लिनिक में मूल्यांकन करा सकते हैं जिन्हें पहले से हार्ट फेल्योर या पल्मोनरी हाइपरटेंशन का निदान हो चुका है। इसके अलावा बार-बार सांस फूलने, पैरों में सूजन या अत्यधिक थकान की शिकायत वाले मरीज भी विशेषज्ञ मूल्यांकन करा सकते हैं। रात में सांस फूलने से नींद खुलना या सोते समय कई तकियों की जरूरत पड़ना भी ऐसी शिकायतें हैं जिनके लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत हो सकती है। हार्ट अटैक के बाद जिन मरीजों को हृदय की पंपिंग क्षमता कम बताई गई है, वे भी इस क्लिनिक में फॉलो-अप करा सकते हैं। इसी तरह इकोकार्डियोग्राफी में हृदय की पंपिंग क्षमता कम या फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में दबाव अधिक पाए जाने वाले मरीजों के लिए भी यह विशेष क्लिनिक उपलब्ध है।
हृदय की मांसपेशियों, वाल्व या जन्मजात हृदय रोग के साथ सांस फूलने की समस्या वाले मरीजों का भी यहां मूल्यांकन किया जा सकता है। पल्मोनरी हाइपरटेंशन की आशंका वाले या आगे विस्तृत जांच की आवश्यकता वाले मरीज भी विशेषज्ञ परामर्श ले सकते हैं। जिन हार्ट फेल्योर मरीजों को बीमारी के कारण बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है या दवाएं लेने के बावजूद लक्षण बने हुए हैं, उनके लिए भी नियमित फॉलो-अप की सुविधा इस क्लिनिक में उपलब्ध होगी।
क्लिनिक के उद्घाटन के दौरान संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी. एम. सिंह ने कहा कि हार्ट फेल्योर और पल्मोनरी हाइपरटेंशन ऐसे रोग हैं जिनमें केवल एक बार उपचार पर्याप्त नहीं होता। उन्होंने नियमित निगरानी और समय-समय पर उपचार में बदलाव को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस समर्पित क्लिनिक के माध्यम से मरीजों को एक ही स्थान पर विशेषज्ञ मूल्यांकन, नियमित फॉलो-अप और आवश्यक परामर्श मिल सकेगा। उनके अनुसार संस्थान का प्रयास गंभीर हृदय रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए व्यवस्थित, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली विशेष सेवाएं उपलब्ध कराना है। निदेशक ने कार्डियोलॉजी विभाग को इस पहल के लिए बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि रोग-विशिष्ट क्लिनिक मरीजों के दीर्घकालिक परिणाम और जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भुवन चंद्र तिवारी ने हार्ट फेल्योर को तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बताया। उन्होंने कहा कि कई मरीज बीमारी के शुरुआती संकेत समय पर पहचान में नहीं आने या नियमित फॉलो-अप न होने के कारण बार-बार अस्पताल में भर्ती होते हैं। उन्होंने कहा, “इस विशेष क्लिनिक का उद्देश्य केवल दवा देना नहीं, बल्कि मरीज को लंबे समय तक व्यवस्थित तरीके से मॉनिटर करना, दवाओं को वैज्ञानिक रूप से अनुकूलित करना तथा मरीज और उसके परिवार को बीमारी के प्रति जागरूक बनाना है।”
प्रो. तिवारी ने पल्मोनरी हाइपरटेंशन के मरीजों के संदर्भ में कहा कि कई मरीज देर से विशेषज्ञ केंद्र तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि सांस फूलने जैसी सामान्य प्रतीत होने वाली शिकायत के पीछे कभी-कभी गंभीर पल्मोनरी हाइपरटेंशन हो सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर सही निदान और उचित उपचार से ऐसे मरीजों की कार्यक्षमता, जीवन की गुणवत्ता और भविष्य के परिणाम बेहतर किए जा सकते हैं।
विभागाध्यक्ष के अनुसार विशेष क्लिनिक में मरीजों की लक्षण आधारित निगरानी के साथ वजन और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक संकेतकों का मूल्यांकन किया जाएगा। मरीज की कार्यक्षमता, इकोकार्डियोग्राफी और दवाओं की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार दवाओं में बदलाव, आगे की जांच और उपचार की योजना तैयार की जाएगी। इस तरह क्लिनिक का फोकस केवल तत्काल परामर्श तक सीमित न रहकर नियमित फॉलो-अप और बीमारी की निगरानी पर भी रहेगा।
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