ग्रामीण परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अब गांवों में रोजगार की गारंटी पहले से अधिक मजबूत होगी। नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों तक अकुशल रोजगार और ₹300 प्रतिदिन मजदूरी का प्रावधान किया गया है। इसी को लेकर अम्बेडकरनगर में आयोजित पंच सम्मेलन में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं और इसके प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी गई।
ग्रामीण विकास और रोजगार को नई दिशा देने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी ईशा प्रिया की अध्यक्षता में पंच सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में "विकसित भारत–जी-राम-जी अधिनियम, 2025" की प्रमुख विशेषताओं, उद्देश्यों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में सदस्य विधान परिषद हरिओम पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्याम सुंदर वर्मा उर्फ साधु वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार शुक्ला ने बताया कि यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुका है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिनों के अकुशल रोजगार की गारंटी दी जाएगी। इसके साथ ही मजदूरी बढ़ाकर ₹300 प्रतिदिन निर्धारित की गई है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत किए जाने वाले अनुमन्य कार्यों की संख्या भी बढ़ाकर 318 कर दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की संभावनाएं बढ़ेंगी और अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्याम सुंदर वर्मा उर्फ साधु वर्मा ने कहा कि ग्राम प्रशासकों को नई व्यवस्था में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे योजना का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने किसानों के हित में 60 दिनों के कृषि अवकाश के प्रावधान का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह व्यवस्था कृषि कार्यों के दौरान ग्रामीण परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगी। साथ ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
जिलाधिकारी ईशा प्रिया ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास खंड स्तर पर भी कार्यशालाओं का आयोजन किया जाए, ताकि योजना से जुड़ी सभी जानकारियां अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकें।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि योजना के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए, जिससे पात्र लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अधिकारियों ने बताया कि नए अधिनियम के तहत योजना को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से कई सुधार लागू किए गए हैं। रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ विकास कार्यों के दायरे का विस्तार किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आधारभूत विकास दोनों को गति मिलने की उम्मीद है।
यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, आधारभूत विकास कार्यों को गति देने और पात्र परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किया गया है। इसके तहत रोजगार की अवधि बढ़ाने, मजदूरी में वृद्धि, अधिक विकास कार्यों को शामिल करने और योजना के संचालन में पारदर्शिता लाने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
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