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बिना वजह पेड़ काटने की मंजूरी देना पड़ा भारी, दिल्ली हाई कोर्ट ने दो पूर्व वन अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया

ग्रेटर कैलाश पार्ट-दो में दो पेड़ों की कटाई की अनुमति देने का मामला; अदालत ने कहा- पहले दिए गए आदेशों का किया गया जानबूझकर उल्लंघन, अब बताना होगा क्यों न मिले सजा
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Bureau News Desk
01 Aug 2026
11:34 AM
1 min read
बिना वजह पेड़ काटने की मंजूरी देना पड़ा भारी, दिल्ली हाई कोर्ट ने दो पूर्व वन अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया
हाइलाइट्स
दिल्ली हाई कोर्ट ने दो पूर्व वन अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया।
मामला ग्रेटर कैलाश पार्ट-दो में दो पेड़ों की कटाई की अनुमति से जुड़ा है।
अदालत ने कहा कि पहले जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर सजा पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया।

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने ग्रेटर कैलाश पार्ट-दो क्षेत्र में दो बड़े पेड़ों की कटाई की अनुमति देने के मामले में दिल्ली सरकार के दो पूर्व वन अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। अदालत ने माना कि अधिकारियों ने पहले से जारी न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किया और पेड़ों की कटाई की अनुमति देते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

यह मामला दिल्ली सरकार के पूर्व प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स सीडी सिंह और दक्षिण वन प्रभाग के पूर्व ट्री ऑफिसर मंदीप मित्तल से जुड़ा है। अदालत ने दोनों अधिकारियों को अवमानना अधिनियम की धारा 12 के तहत दोषी माना है।

मामला ग्रेटर कैलाश पार्ट-दो में स्थित दो बड़े पेड़ों की कटाई की अनुमति से जुड़ा है। दिल्ली हाई कोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने वर्ष 2022 में पारित अदालत के आदेशों के बावजूद पेड़ काटने की अनुमति प्रदान की, जबकि पहले अदालत स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर चुकी थी कि ऐसे मामलों में प्रत्येक आवेदन का विस्तृत परीक्षण किया जाए। अदालत ने कहा कि अनुमति देते समय यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक था कि पेड़ काटने की आवश्यकता क्यों है और किन कारणों के आधार पर अनुमति दी जा रही है।

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जस्टिस जसमीत सिंह की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि अदालत ने पहले भी कई बार स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ट्री ऑफिसर किसी भी पेड़ की कटाई की अनुमति देने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करेंगे।

अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक आवेदन के साथ संबंधित पेड़ों की तस्वीरें रिकॉर्ड पर होना आवश्यक था और अनुमति देने अथवा अस्वीकार करने के पीछे स्पष्ट कारण आदेश में दर्ज किए जाने चाहिए थे। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों पूर्व अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने उनसे पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना के मामले में सजा क्यों न सुनाई जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि अवमानना अधिनियम के तहत दोष सिद्ध होने की स्थिति में छह महीने तक की कारावास, जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।

मामले में अब अगली सुनवाई 2 सितंबर को निर्धारित की गई है। इस दौरान अदालत दोनों अधिकारियों द्वारा दाखिल किए जाने वाले शपथपत्र पर विचार करेगी और सजा के प्रश्न पर आगे की कार्यवाही करेगी।

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दिल्ली हाई कोर्ट समय-समय पर राजधानी में पेड़ों की कटाई और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करता रहा है। अदालत ने कई मामलों में यह स्पष्ट किया है कि पेड़ों की कटाई अंतिम विकल्प होनी चाहिए और अनुमति देने से पहले सभी वैकल्पिक उपायों पर विचार किया जाना चाहिए।

न्यायालय का कहना रहा है कि अनुमति प्रक्रिया पारदर्शी, कारणयुक्त और रिकॉर्ड आधारित होनी चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

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