सुबह का समय था। बारिश थम चुकी थी, लेकिन विद्यालय परिसर में पानी अब भी जमा था। कुछ किताबें फर्श पर बिखरी थीं। एक स्कूल में बच्चे खिड़कियों से झांकते दिखाई दिए, जबकि दूसरे विद्यालय में दर्जनों पंजीकृत छात्रों के मुकाबले गिने-चुने बच्चे ही कक्षा में मौजूद थे।
यह किसी एक विद्यालय की तस्वीर नहीं, बल्कि अम्बेडकरनगर के कई परिषदीय विद्यालयों की वह जमीनी हकीकत है, जो एनडीवी टुडे की पड़ताल के के दौरान सामने आई।
एक ओर प्रदेशभर में 'स्कूल चलो अभियान' के जरिए अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालयों तक लाने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कई विद्यालयों की मौजूदा स्थिति इस अभियान की चुनौतियों को भी सामने रखती है। जमीनी पड़ताल के दौरान कई विद्यालयों में ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने स्कूलों की आधारभूत व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए।
कहीं विद्यालय परिसर में जलभराव था। कहीं किताबें सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय फर्श पर रखी मिलीं। कुछ स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम रही, जबकि एक विद्यालय में बच्चे खिड़कियों पर चढ़े दिखाई दिए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता सामने आई।
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प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर कला में कुल 196 छात्र पंजीकृत हैं। निरीक्षण के समय केवल 75 छात्र उपस्थित मिले। बारिश के कारण विद्यालय परिसर में जलभराव था। इसी दौरान कुछ किताबें फर्श पर रखी मिलीं। विद्यालय में तैनात 13 शिक्षकों में से 9 शिक्षक उपस्थित पाए गए।
प्राथमिक विद्यालय कुर्मीडीहा की तस्वीर भी अलग नहीं थी। यहां 49 पंजीकृत छात्रों के मुकाबले केवल 6 बच्चे उपस्थित मिले। कम उपस्थिति ने नियमित विद्यालय आने वाले बच्चों की संख्या को लेकर सवाल खड़े किए।
प्राथमिक विद्यालय अहिरौली में 111 पंजीकृत छात्रों में से 54 छात्र उपस्थित थे। निरीक्षण के दौरान कुछ बच्चे खिड़कियों पर चढ़े और बाहर झांकते दिखाई दिए। यह दृश्य विद्यालय परिसर में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाने वाला था।
प्राथमिक विद्यालय कटेहरी सेकेंड में निरीक्षण के दौरान शौचालय उपलब्ध नहीं मिला। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका के संबंध में जानकारी दी गई कि वह बैठक में शामिल होने गई थीं।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि विद्यालयों में केवल नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण, नियमित उपस्थिति, स्वच्छ परिसर और आवश्यक आधारभूत सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, ताकि शिक्षा का उद्देश्य प्रभावी ढंग से पूरा हो सके।
इस संबंध में पूछे जाने पर एबीएसए प्रिया पाठक ने कहा,
"मैं स्वयं निरीक्षण पर निकली हूं। संबंधित विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।"
फिलहाल निरीक्षण में सामने आई कमियों के बाद संबंधित विद्यालयों की व्यवस्थाओं और विभागीय कार्रवाई पर निगाह रहेगी।
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