UP News: मीरजापुर के जरगो बांध में करीब 30 साल बाद पानी की उपलब्धता बेहतर होने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से मेजा-जरगो लिंक नहर के लंबे समय से खराब पड़े दोनों गेटों की मरम्मत कराई गई है। इसके बाद बांध तक पानी पहुंचने का रास्ता साफ कराया गया। वर्तमान में लिंक नहर के जरिए जरगो बांध में 229 क्यूसेक पानी पहुंचाया जा रहा है। इससे क्षेत्र के करीब 15 हजार किसानों को फायदा मिल रहा है और 6,300 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई में बेहतर मदद मिलेगी।
मेजा-जरगो लिंक नहर मीरजापुर में सिंचाई व्यवस्था का अहम हिस्सा है। करीब 71.130 किलोमीटर लंबी इस नहर की क्षमता 580 क्यूसेक पानी की है। नहर के हेड पर लगे दोनों अंडर स्लूस गेट कई सालो से खराब थे। इनके जरिए करीब 150 क्यूसेक पानी लगातार बहकर बर्बाद हो रहा था। इसके चलते पानी का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। साथ ही नहर के आगे करीब 10 किलोमीटर हिस्से में गाद जमा होने के कारण सफाई का काम भी प्रभावित हो रहा था। सिंचाई विभाग ने दोनों गेटों की मरम्मत कराकर पानी के रिसाव को रोक दिया है। इससे नहर में पानी के बहाव को नियंत्रित करना आसान हुआ है और बांध तक पानी पहुंचाने में सुधार आया है।
गेटों की मरम्मत करना आसान नहीं था । ये पानी की सतह से करीब 15 मीटर नीचे लगे थे। यहां पानी का दबाव भी काफी ज्यादा था। ऐसे में सीधे पानी के अंदर जाकर जांच करना काफी जोखिम भरा था। सिंचाई विभाग की बरेली स्थित कार्यशाला की टीम ने पहले रिसाव को अस्थायी रूप से रोका। इसके बाद 4के कैमरे से लैस रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) की मदद से गेटों की जांच की गई। जांच में गेटों की रबर सील, रोलर और बेयरिंग खराब मिले जिसके बाद पुराने हिस्सों को बदलकर नए हिस्से लगाए गए। दीवार में मौजूद छेदों को विशेष सामग्री से भरा गया और गेटों को दोबारा स्थापित किया गया। मरम्मत के बाद रिसाव की जांच भी की गई।
गेटों की मरम्मत से करीब 150 क्यूसेक पानी की बर्बादी रुकने का दावा किया गया है। अब नहर में गाद की सफाई का रास्ता भी साफ हुआ है। इससे पानी का बहाव बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी। जरगो बांध में पानी की उपलब्धता बढ़ने से खरीफ और रबी की फसलों की सिंचाई में किसानों को राहत मिलेगी। करीब 6,300 हेक्टेयर खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचने से कृषि कार्यों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से चली आ रही समस्या दूर होने से क्षेत्र के किसानों को अब सिंचाई के लिए बेहतर व्यवस्था मिलने की उम्मीद जागी है।
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