उत्तर प्रदेश के राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षिकाओं के लिए वर्ष 2026-27 की स्थानांतरण एवं समायोजन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग इस बार भी वर्ष 2017 में लागू की गई ऑनलाइन और पारदर्शी स्थानांतरण नीति के तहत तबादले करेगा। विभाग का लक्ष्य जून माह के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर विद्यालय खुलने से पहले शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करना है। विभाग की ओर से जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जाएगा। स्थानांतरण और समायोजन प्रक्रिया में शिक्षकों की संतुलित तैनाती, रिक्त पदों की पूर्ति और विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात को व्यवस्थित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षकों की संतुलित तैनाती सुनिश्चित करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले को तीन अलग-अलग जोन में विभाजित किया है। नई व्यवस्था के अनुसार जिला मुख्यालय या नगर निकाय सीमा से आठ किलोमीटर तक के क्षेत्र को जोन-1 माना जाएगा। तहसील मुख्यालय से दो किलोमीटर तक के क्षेत्र को जोन-2 तथा शेष सभी क्षेत्रों को जोन-3 की श्रेणी में रखा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नई नियुक्तियों में सबसे पहले जोन-3 में तैनाती की जाएगी। यहां नियुक्त होने वाले शिक्षकों को कम से कम तीन वर्ष तक सेवा देनी होगी।
स्थानांतरण प्रक्रिया के पहले चरण में उन शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा जिन्हें सरप्लस श्रेणी में रखा जाएगा। सरप्लस शिक्षकों की पहचान के लिए विभाग ने 'लास्ट इन फर्स्ट आउट' सिद्धांत अपनाने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है कि जिस शिक्षक ने किसी विद्यालय में सबसे बाद में कार्यभार ग्रहण किया होगा, उसे सबसे पहले सरप्लस माना जाएगा। हालांकि कुछ श्रेणियों के शिक्षकों को यथासंभव इस प्रक्रिया से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है।
विभाग द्वारा जारी प्रावधानों के अनुसार सेना और अर्द्धसैनिक बलों में तैनात कर्मियों के पति या पत्नी, गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षक, 58 वर्ष या उससे अधिक आयु के शिक्षक, एक ही जिले में कार्यरत दंपती तथा राज्य या राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन श्रेणियों के शिक्षकों को सरप्लस घोषित करने से बचाने का प्रयास किया जाएगा और स्थानांतरण प्रक्रिया में उनकी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा।
स्थानांतरण एवं समायोजन प्रक्रिया में शामिल शिक्षकों को ऑनलाइन विकल्प भरना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई शिक्षक निर्धारित समय के भीतर आवेदन या विकल्प नहीं भरता है तो उसे किसी भी रिक्त विद्यालय में समायोजित किया जा सकता है। ऐसे मामलों में विभाग को स्वयं विद्यालय निर्धारित करने का अधिकार होगा। यही कारण है कि पात्र शिक्षकों के लिए निर्धारित समय में आवेदन प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समायोजन और स्थानांतरण प्रक्रिया में विभिन्न मानकों के आधार पर गुणांक निर्धारित किए जाएंगे। दिव्यांगता, गंभीर बीमारी, महिला शिक्षक, विधवा, तलाकशुदा, विधुर, जोन-2 और जोन-3 में की गई सेवा अवधि, आयु तथा राज्य या राष्ट्रीय पुरस्कार जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए अंक दिए जाएंगे। इन्हीं अंकों के आधार पर पात्र शिक्षकों की वरीयता तय की जाएगी।
प्रक्रिया के दूसरे चरण में सेना या अर्द्धसैनिक बलों में तैनात कर्मियों के पति-पत्नी, गंभीर बीमारियों से ग्रस्त शिक्षक, 58 वर्ष से अधिक आयु वाले शिक्षक तथा अलग-अलग जिलों में कार्यरत दंपतियों के स्थानांतरण पर प्राथमिकता से विचार किया जाएगा। इसके बाद शेष शिक्षकों के आवेदनों का निस्तारण निर्धारित गुणांक प्रणाली के आधार पर किया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि कुल संवर्ग के 20 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे। इसके साथ ही किसी भी विद्यालय में छात्र-शिक्षक मानक से अधिक शिक्षकों की तैनाती नहीं की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा है कि किसी शिक्षक को उसकी मूल तैनाती से अलग किसी अन्य विद्यालय में संबद्ध नहीं किया जाएगा।
समायोजन और स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है। हालांकि जनहित और प्रशासनिक आवश्यकता को देखते हुए कुल संवर्ग के चार प्रतिशत तक तबादलों का अधिकार विभागीय मंत्री को दिया गया है। ऐसे मामलों में विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जा सकेगा।
यदि दो या अधिक शिक्षकों के गुणांक समान पाए जाते हैं तो अधिक आयु वाले शिक्षक को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि आयु भी समान होती है तो वरिष्ठता के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।
FAQs
प्रश्न 1: शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया कब तक पूरी होगी?
उत्तर: विभाग जून माह के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी में है।
प्रश्न 2: सरप्लस शिक्षक कैसे तय किए जाएंगे?
उत्तर: 'लास्ट इन फर्स्ट आउट' सिद्धांत के आधार पर।
प्रश्न 3: क्या आवेदन करना अनिवार्य है?
उत्तर: हां, पात्र शिक्षकों को ऑनलाइन विकल्प भरना होगा।
प्रश्न 4: आवेदन नहीं करने पर क्या होगा?
उत्तर: विभाग किसी भी रिक्त विद्यालय में शिक्षक का समायोजन कर सकता है।
प्रश्न 5: किन शिक्षकों को प्राथमिकता मिलेगी?
उत्तर: सेना कर्मियों के जीवनसाथी, गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षक, 58 वर्ष से अधिक आयु वाले शिक्षक, दंपती शिक्षक तथा पुरस्कार प्राप्त शिक्षक।
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