>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर एक्शन मोड में हैं। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन को लेकर उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों का विलय केवल तय मानकों के अनुरूप ही किया जाए, अन्यथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। रविवार को लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि बच्चों की पढ़ाई किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
>सीएम योगी का यह सख्त रुख तब सामने आया है जब राज्य में कुछ स्कूलों के गलत तरीके से विलय की शिकायतें मिली थीं। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक भी मामला अनियमितता का मिला, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और कठोर कदम उठाए जाएंगे।
>इससे पहले बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने प्रेस वार्ता में कहा था कि 50 से अधिक नामांकन वाले और एक किलोमीटर की दूरी के तय मानकों के उल्लंघन में किए गए विलय की समीक्षा की जा रही है। ऐसे सभी मामलों को निरस्त किया जाएगा और एक सप्ताह की समयसीमा में पूरी प्रक्रिया को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
>इसी बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ड्रोन के अवैध इस्तेमाल से फैलाई जा रही दहशत को लेकर भी सख्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक का दुरुपयोग करने वाले कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
>बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने वालों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज किया जाएगा, और जरूरत पड़ी तो उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि ऐसे लोगों की संपत्ति जब्त की जाए और कानून को हाथ में लेने वालों को किसी भी हाल में छोड़ा न जाए।
>सीएम योगी ने गृह विभाग और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि प्रदेश में ड्रोन संचालन के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वालों को कड़ा संदेश देने की जरूरत है।
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