उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राज्य सरकार के सहयोगी दल के नेता एवं मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि पंचायत चुनाव की तिथि अब अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।
पंचायत चुनाव को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग को कोर्ट ने तलब किया है और अब न्यायालय के निर्णय के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत का आदेश नहीं आता, तब तक चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाना संभव नहीं है।
प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सभी राजनीतिक दल पंचायत चुनाव को अपनी जमीनी ताकत के आकलन के रूप में देख रहे हैं।
पंचायत चुनाव के समय और प्रक्रिया को लेकर पहले भी न्यायिक हस्तक्षेप देखने को मिला है। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दखल दिया था और 2015 के आधार पर चुनाव कराने का निर्देश दिया था।
वर्तमान स्थिति में भी आरक्षण, मतदाता सूची और प्रशासनिक तैयारियों से जुड़े मुद्दे अदालत में विचाराधीन बताए जा रहे हैं, जिसके कारण चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हो पा रहा है।
यूपी पंचायत चुनाव: पिछले चुनावों का संक्षिप्त इतिहास: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सामान्यतः हर पांच वर्ष में कराए जाते हैं, हालांकि कई बार न्यायिक या प्रशासनिक कारणों से देरी भी हुई है :-
1995: नियत समय पर चुनाव सम्पन्न
2000: समय पर चुनाव आयोजित
2005: निर्धारित समयानुसार चुनाव
2010: नियमित चक्र के अनुसार चुनाव
2015: समय पर चुनाव सम्पन्न
2021: आरक्षण विवाद के कारण न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद प्रक्रिया में बदलाव
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