लखनऊ। उत्तर प्रदेश के करीब 3.7 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई महीने में बिजली बिल में राहत मिलने जा रही है। बिजली बिल पर लगने वाले फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट में 4.43 प्रतिशत की कमी किए जाने के बाद उपभोक्ताओं के जुलाई माह के बिल में इसका लाभ दिखाई देगा।
यह राहत ऐसे समय मिली है जब जून महीने के बिजली बिलों में मार्च माह के लिए 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क वसूले जाने को लेकर उपभोक्ताओं के बीच व्यापक असंतोष देखने को मिला था। अब जुलाई में फ्यूल सरचार्ज कम होने से बिजली बिल का बोझ कुछ कम होने की उम्मीद है।
फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट वह अतिरिक्त राशि होती है, जिसे बिजली उत्पादन की लागत में बदलाव के आधार पर बिजली बिल में जोड़ा या घटाया जाता है। यदि बिजली उत्पादन में उपयोग होने वाले ईंधन, परिवहन या खरीद लागत में वृद्धि होती है तो इसका असर उपभोक्ताओं के बिल पर पड़ता है। वहीं लागत कम होने की स्थिति में फ्यूल सरचार्ज भी घटाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था अब डीजल और पेट्रोल की कीमतों की तरह हर महीने लागू की जा रही है, जिसके तहत बिजली बिल में ईंधन अधिभार शुल्क समय-समय पर बढ़ या घट सकता है।
जून माह के बिजली बिलों में मार्च 2026 की अवधि के लिए 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क जोड़ा गया था। अतिरिक्त शुल्क लगने के बाद कई उपभोक्ताओं ने बिजली बिल में हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाए थे। उपभोक्ता संगठनों ने भी इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसकी समीक्षा की मांग की थी। अब जुलाई माह के लिए ईंधन अधिभार शुल्क में 4.43 प्रतिशत की कमी किए जाने से उपभोक्ताओं को पिछले महीने की तुलना में कुछ राहत मिलेगी।
उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने ईंधन अधिभार शुल्क में कमी को अपनी लगातार की गई पहल का परिणाम बताया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि परिषद लगातार बिजली उपभोक्ताओं के हितों से जुड़े मुद्दों को उठा रही है। उनका दावा है कि बिजली विभाग को भविष्य में भी उपभोक्ताओं से अधिक वसूली गई राशि वापस करनी पड़ेगी। हालांकि, बिजली विभाग की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ईंधन अधिभार शुल्क में 4.43 प्रतिशत की कमी का सीधा प्रभाव जुलाई माह के बिजली बिल पर पड़ेगा। हालांकि किसी उपभोक्ता को वास्तविक रूप से कितनी राहत मिलेगी, यह उसकी बिजली खपत और बिलिंग श्रेणी पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्यूल सरचार्ज में बदलाव उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण घटक है। इसलिए इसमें होने वाली बढ़ोतरी या कमी का असर अलग-अलग श्रेणी के उपभोक्ताओं पर अलग-अलग हो सकता है।
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