संकट में घिरे टीईटी शिक्षकों को योगी सरकार का सहारा, हितों की रक्षा का भरोसा

शिक्षक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात में मुख्यमंत्री ने कहा- लंबे अनुभव और योगदान का सम्मान करते हुए सरकार करेगी आवश्यक कदम।
Bureau 11 Jun 2026, 06:06 PM 1 min read
संकट में घिरे टीईटी शिक्षकों को योगी सरकार का सहारा, हितों की रक्षा का भरोसा

 

परिषदीय विद्यालयों में टीईटी अनिवार्यता के कारण प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सकारात्मक आश्वासन दिया है। शिक्षक प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अनुभव और योगदान का सम्मान किया जाएगा तथा उनके हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

 

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी और संयुक्त महामंत्री अमित सिंह ने विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह और राज बहादुर सिंह चंदेल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके कालीदास मार्ग स्थित आवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े रसोइयों के लिए लागू कैशलेस चिकित्सा योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

 

बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने टीईटी अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों का मामला उठाया। प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्षों से विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद संकट में आ गई हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर वेटेज दिया जाए और विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित कर उनकी सेवाओं को सुरक्षित किया जाए।

 

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों के अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने एक सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सभी शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

 

बैठक के दौरान वर्ष 2000 के बाद अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्त तदर्थ शिक्षकों का मामला भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के एक अंतरिम आदेश में कहा गया था कि इन शिक्षकों को बाहर करने की मंशा नहीं है। साथ ही 9 नवंबर 2023 के शासनादेश में संशोधन या उसे निरस्त कर राजकोष से वेतन प्राप्त कर रहे तदर्थ शिक्षकों को वर्तमान पदों पर समायोजित करने का सुझाव भी दिया गया।

 

एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता सकारात्मक रही है। उन्होंने शिक्षकों से किसी भ्रम में न पड़ने की अपील करते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों के अनुभव का सम्मान करते हुए उचित समाधान निकालने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है।

 

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