जमीन ही नहीं थी पर्याप्त, फिर भी बेच डाले 496 प्लॉट; 7 साल बाद आरोपी गिरफ्तार

कृष्ण कुंज टाउनशिप परियोजना के जरिए निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाने के आरोप में 2019 से फरार चल रहे घोषित अपराधी शिव नंदन सिंह यादव को आर्थिक अपराध शाखा ने फरीदाबाद से गिरफ्तार किया।
Bureau 14 Jun 2026, 11:03 AM 1 min read
जमीन ही नहीं थी पर्याप्त, फिर भी बेच डाले 496 प्लॉट; 7 साल बाद आरोपी गिरफ्तार

 

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने करोड़ों रुपये के कथित रियल एस्टेट घोटाले में लंबे समय से फरार चल रहे घोषित अपराधी शिव नंदन सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार आरोपी वर्ष 2019 से गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था और वर्ष 2023 में अदालत ने उसे घोषित अपराधी करार दिया था।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्लोब रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड के जरिए वर्ष 2013 में हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद स्थित तिलोरी खादर गांव में कृष्ण कुंज टाउनशिप नाम से एक आवासीय परियोजना शुरू की गई थी। कंपनी की ओर से लोगों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त विकसित कॉलोनी का आश्वासन दिया गया था। आकर्षक विज्ञापनों और विभिन्न दावों के माध्यम से लोगों को प्लॉट बुकिंग के लिए प्रेरित किया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में निवेशकों ने परियोजना में पैसा लगाया।

 

दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया कि कंपनी ने लगभग 10.26 एकड़ भूमि पर 496 आवासीय प्लॉट विकसित करने का दावा किया था। हालांकि, जांच के दौरान यह पाया गया कि परियोजना के लिए आवश्यक वैध और पर्याप्त जमीन कंपनी के पास उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद निवेशकों से प्लॉट बुकिंग के नाम पर लगातार धनराशि ली जाती रही।

 

पुलिस के मुताबिक, कंपनी और उसके निदेशकों ने निवेशकों को विभिन्न आश्वासन देकर उनकी रकम हासिल की। आरोप है कि करोड़ों रुपये जुटाने के बाद न तो परियोजना पूरी की गई और न ही निवेशकों को प्लॉट उपलब्ध कराए गए। इस कारण बड़ी संख्या में निवेशकों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2019 में कड़कड़डूमा कोर्ट के निर्देश पर अलग-अलग शिकायतकर्ताओं की ओर से कुल नौ एफआईआर दर्ज की गई थीं। जांच के दौरान सभी मामलों में एक समान साजिश और एक ही कंपनी की भूमिका सामने आई। इसके बाद आर्थिक अपराध शाखा ने मामले की जांच अपने हाथ में ली।

 

मुख्य आरोपी शिव नंदन सिंह यादव लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा, जिसके कारण पुलिस को उसे पकड़ने में सफलता नहीं मिल रही थी। कई बार छापेमारी के बावजूद वह गिरफ्तारी से बचने में कामयाब रहा। लंबे समय तक फरार रहने के कारण अदालत ने वर्ष 2023 में उसे सभी मामलों में घोषित अपराधी घोषित कर दिया था।

 

आर्थिक अपराध शाखा की टीम आरोपी की तलाश में लगातार जुटी हुई थी। तकनीकी विश्लेषण, निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी फरीदाबाद में छिपा हुआ है। इसके बाद विशेष टीम ने 12 जून को कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

 

दिल्ली पुलिस के अनुसार आरोपी की गिरफ्तारी को मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित घोटाले का दायरा कितना बड़ा है, कितने लोग इसकी चपेट में आए और जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।

 

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