दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित सैदुलअजाइब इलाके में पांच मंजिला इमारत ढहने के मामले में दिल्ली सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर महरौली थाने में मामला दर्ज किया गया है और डीएम की अगुवाई में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। हादसे में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार सुबह घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से हादसे की विस्तृत जानकारी ली और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राजधानी में बिना अनुमति निर्मित और जर्जर इमारतों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को भी कहा है।
एम्स और सफदरजंग अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसे में मरने वालों की संख्या चार हो गई है। सभी मृतकों को अस्पतालों में मृत अवस्था में लाया गया था। एम्स में कुल 11 घायल पहुंचे थे, जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई। शेष आठ घायलों में से तीन को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि पांच लोगों का उपचार जारी है। वहीं एक मरीज को मदन मोहन मालवीय अस्पताल से रेफर कर सफदरजंग अस्पताल भेजा गया था, जहां उसे मृत अवस्था में लाया गया। सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, इस घटना से संबंधित अन्य कोई मरीज वहां भर्ती नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि हादसे के कारणों की जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे के समय इमारत और उसके आसपास करीब 70 से 80 लोग मौजूद थे, जिनमें कुछ विदेशी छात्र भी शामिल थे। हालांकि प्रशासन का कहना है कि मलबे में अब एक या दो लोगों के फंसे होने की आशंका है और बचाव अभियान जारी है।
जानकारी के मुताबिक, लगभग 400 वर्ग गज क्षेत्र में स्थित इस भवन का निर्माण करीब 15 वर्ष पहले दो मंजिला संरचना के रूप में हुआ था। बाद में इसमें क्रमिक रूप से मंजिलें जोड़ी गईं और हाल के दिनों में पांचवीं मंजिल के ऊपर एक अतिरिक्त तल का निर्माण कार्य भी चल रहा था। यह इमारत कर्मवीर जेलर नामक व्यक्ति की बताई जा रही है।
भवन में कोचिंग संस्थान, पीजी आवास, कैफे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। अवकाश होने के कारण बड़ी संख्या में लोग पहले ही परिसर से बाहर जा चुके थे। जो लोग मौजूद थे, उनमें से कई आसपास के कैफे, रेस्तरां और अन्य स्थानों पर गए हुए थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इमारत के बगल में बने पोर्टा केबिन ढांचे में एक महिला की कैंटीन संचालित होती है। घटना के समय अधिकांश लोग कैंटीन में भोजन कर रहे थे, जबकि कुछ लोग भवन के भूतल पर स्थित लाइब्रेरी में मौजूद थे।
बताया गया कि ऊपरी मंजिलों पर उस समय कोई नहीं था। शनिवार शाम करीब साढ़े सात बजे अचानक इमारत ढह गई, जिससे मलबा कैंटीन और लाइब्रेरी क्षेत्र पर आ गिरा। भोजन कर रहे और लाइब्रेरी में मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए। राहत एवं बचाव दल ने घायलों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया। एम्स प्रशासन के अनुसार, अस्पताल में लाए गए घायलों में कई लोगों का इलाज जारी है। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है, जबकि अन्य को निगरानी में रखा गया है।
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