>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने आरएसएस की राष्ट्र निर्माण यात्रा को नमन करते हुए विशेष स्मारक डाक टिकट और ₹100 का स्मारक सिक्का जारी किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा त्याग, निःस्वार्थ सेवा, राष्ट्र निर्माण और अनुशासन की अद्भुत मिसाल है। RSS के शताब्दी समारोह का हिस्सा बनकर अत्यंत गौरवान्वित अनुभव कर रहा हूं।
— Narendra Modi (@narendramodi) October 1, 2025
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>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आरएसएस की स्थापना केवल एक संगठन की शुरुआत नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय चेतना का पुनर्जागरण थी। डॉ. हेडगेवार की प्रेरणा से शुरू हुई यह यात्रा आज “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संकल्प में परिवर्तित हो चुकी है।
>उन्होंने कहा कि संघ की शाखा केवल व्यायामशाला नहीं, बल्कि प्रेरणा का अखाड़ा है, जहां ‘मैं से हम’ की यात्रा शुरू होती है। प्रधानमंत्री ने 1963 गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस स्वयंसेवकों की ऐतिहासिक भागीदारी को याद करते हुए कहा कि आज जारी डाक टिकट उस गौरवपूर्ण क्षण का प्रतीक है।
>मोदी ने कहा कि पिछले सौ वर्षों में संघ ने शिक्षा, सेवा, सामाजिक उत्थान, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी कल्याण और आपदा राहत जैसे तमाम क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने स्वयंसेवकों की त्याग भावना, राष्ट्र प्रथम की नीति और संविधान पर आस्था को भारत की असली ताकत बताया।
>प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से आरएसएस के ‘पंच परिवर्तन’ आत्मजागरूकता, सामाजिक समरसता, परिवार जागरूकता, नागरिक अनुशासन और पर्यावरण चेतना को भारत के भविष्य का पथदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि यही पांच संकल्प 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की मजबूत नींव रखेंगे।
>इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
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