>नवरात्रि के 9 दिवसीय पर्व की शुरुआत होते ही उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। इस बार नॉन-वेज पर रोक और गरबा उत्सव में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर विवाद बढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एसटी हसन ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने नॉन-वेज पर रोक का विरोध करते हुए गरबा में मुसलमानों की भागीदारी पर सहमति जताई।
>एसटी हसन ने नवरात्रि के दौरान मांस की दुकानों को बंद करने की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा, "यह देश सभी का है। मुसलमान, ईसाई और सिख भी नॉन-वेज खाते हैं। नवरात्रि और कांवड़ यात्रा में किसी को मांस खाने से कैसे रोका जा सकता है? आप होते कौन हैं रोकने वाले?" उन्होंने फाइव-स्टार होटलों में बीफ की बिक्री पर रोक न लगाने को राजनीतिक ड्रामेबाजी करार दिया और कहा कि यह सब वोटों की राजनीति का हिस्सा है।
>वहीं, मध्य प्रदेश में गरबा और डांडिया उत्सव में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर उन्होंने कहा, "मैं इस फेवर में हूं कि मुसलमान बच्चों को इसमें शामिल नहीं होना चाहिए। मुसलमान लड़कों से आग्रह है कि हिंदू लड़कियों को अपनी बहन समझें।" एसटी हसन ने इस बयान के माध्यम से लव जिहाद और धार्मिक ध्रुवीकरण के मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए अपनी राय रखी।
>एसटी हसन ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा नियम सख्त करने पर चिंता जताई और कहा कि सरकार की विदेश नीति पूरी तरह नाकाम है। साथ ही उन्होंने पीएम की छवि और उनके विदेशी संबंधों पर सवाल उठाए।
>इस विवादित बयान ने नवरात्रि उत्सव और राजनीतिक माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक ओर धार्मिक भावनाओं को लेकर चर्चा है तो दूसरी ओर राजनीतिक ध्रुवीकरण पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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