दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मिरांडा हाउस कॉलेज में छात्राओं के लिए आवास सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। कॉलेज प्रशासन ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग / ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग छात्राओं को प्राथमिकता देते हुए 120 बेड वाले नए छात्रावास के निर्माण की योजना बनाई है। प्रस्तावित छात्रावास का उद्देश्य उन छात्राओं को सुरक्षित और अपेक्षाकृत किफायती आवास उपलब्ध कराना है, जिन्हें दिल्ली में पढ़ाई के दौरान महंगे किराये और सीमित हॉस्टल सीटों के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
कॉलेज प्रशासन के अनुसार नया छात्रावास मौजूदा हॉस्टल परिसर के पीछे कॉलेज परिसर में ही बनाया जाएगा। फिलहाल परियोजना के प्रारंभिक डिजाइन पर काम चल रहा है और अगले दो सप्ताह में इसका प्रारूप तैयार होने की उम्मीद है। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
कॉलेज अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना का निर्माण सीएसआर के सहयोग से किया जाएगा। हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त की जानी हैं। कॉलेज का अनुमान है कि सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य लगभग दो वर्षों में पूरा किया जा सकेगा।
वर्तमान में मिरांडा हाउस के छात्रावास में लगभग 370 छात्राओं के रहने की व्यवस्था है, जबकि हर वर्ष उपलब्ध सीटों की तुलना में कई गुना अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं। सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में छात्राओं को कॉलेज परिसर के बाहर निजी पीजी, किराये के मकानों या अन्य आवासीय विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है, जिनका खर्च अपेक्षाकृत अधिक होता है।
प्रस्तावित 120 नए बेड जुड़ने के बाद कॉलेज की कुल छात्रावास क्षमता बढ़कर लगभग 490 हो जाएगी। इससे अधिक छात्राओं को परिसर में रहने का अवसर मिल सकेगा।
कॉलेज की प्राचार्य प्रो. विजयलक्ष्मी नंदा के अनुसार इस परियोजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा तक पहुंच को अधिक समावेशी बनाना है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाली छात्राओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराने में यह छात्रावास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग छात्राओं को प्राथमिकता देने का उद्देश्य उन विद्यार्थियों की सहायता करना है, जिन्हें आर्थिक या अन्य कारणों से उच्च शिक्षा प्राप्त करने में अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
कॉलेज प्रशासन के अनुसार नए छात्रावास में केवल रहने की व्यवस्था ही नहीं होगी, बल्कि अध्ययन कक्ष, इंटरनेट सुविधा, भोजनालय, साझा उपयोग के क्षेत्र और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य छात्राओं के लिए पढ़ाई के अनुकूल और सुरक्षित वातावरण तैयार करना है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में हर वर्ष 71 हजार 600 से अधिक छात्र स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेते हैं। इसके मुकाबले विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में उपलब्ध हॉस्टल सीटों की संख्या काफी कम है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में छात्रों को निजी आवास पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में मिरांडा हाउस में प्रस्तावित नया छात्रावास विश्वविद्यालय में छात्रावास सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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