सावन मास के पहले सोमवार पर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी स्थित श्री लोधेश्वर महादेवा धाम में श्रद्धा और आस्था का विशाल संगम देखने को मिला। आधी रात से शुरू हुए जलाभिषेक में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान लोधेश्वर महादेव के दर्शन कर जलाभिषेक किया और सुख-समृद्धि, परिवार के कल्याण तथा मंगलमय जीवन की कामना की। पूरे दिन मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से गूंजता रहा।

रविवार रात लगभग 12:15 बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए जलाभिषेक का क्रम प्रारंभ हुआ। यह सिलसिला सोमवार देर रात तक लगातार चलता रहा।

माथे पर त्रिपुंड लगाए, कंधों पर गंगाजल से भरी कांवड़ उठाए और हाथों में डमरू लिए शिवभक्त भजन-कीर्तन करते हुए अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहे। मंदिर परिसर में घंटे, घड़ियाल, डमरू और शंखनाद की ध्वनि के बीच पूरा वातावरण शिवमय बना रहा।
महादेवा धाम में रविवार रात लगभग 10 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष के साथ श्रद्धालु व्यवस्थित रूप से दर्शन और जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ते रहे। पूरे दिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही और मंदिर परिसर में भक्ति का वातावरण बना रहा।
सावन के पहले सोमवार पर झांसी, उरई, जालौन, हमीरपुर, बांदा, सीतापुर, लखनऊ, बहराइच, रायबरेली सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु महादेवा धाम पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का दूध, दही, घी, गंगाजल, शहद, पुष्प, अक्षत, भांग, धतूरा, बेलपत्र, कमल और मिष्ठान अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
जलाभिषेक के दौरान मौसम भी श्रद्धालुओं के अनुकूल रहा। आसमान में छाए बादलों के बीच रिमझिम वर्षा होती रही। श्रद्धालुओं ने इसे धार्मिक आयोजन के बीच अनुकूल मौसम के रूप में अनुभव किया और जलाभिषेक का क्रम बिना किसी व्यवधान के जारी रहा।
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श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। मंदिर के गर्भगृह से लेकर पूरे मेला परिसर तक पुलिस बल की तैनाती की गई। यातायात, भीड़ प्रबंधन तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग स्थानों पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
सोमवार देर रात लगभग दो बजे जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह और पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय स्वयं महादेवा धाम पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं तथा भीड़ प्रबंधन का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए ताकि दर्शन और जलाभिषेक की व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे।
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