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आधी रात समिट बिल्डिंग में पुलिस की बड़ी रेड, 100 से ज्यादा लोग हिरासत में

गोमतीनगर स्थित कॉल सेंटर से कंप्यूटर, सर्वर, मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद; विदेशी संपर्कों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच जारी
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Bureau News Desk
01 Jul 2026
05:40 PM
1 min read
आधी रात समिट बिल्डिंग में पुलिस की बड़ी रेड, 100 से ज्यादा लोग हिरासत में
गोमतीनगर समिट बिल्डिंग में क्राइम ब्रांच की कार्रवाई, इमेज सोर्स - लखनऊ संवाददाता आर के पाल
हाइलाइट्स
गोमतीनगर की समिट बिल्डिंग में देर रात क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई।
100 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी।
कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े होने की जांच।
कंप्यूटर, लैपटॉप, सर्वर, हार्ड डिस्क और मोबाइल बरामद।

राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में स्थित समिट बिल्डिंग में शुक्रवार देर रात क्राइम ब्रांच ने कथित फर्जी कॉल सेंटर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार छापेमारी के दौरान 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। शुरुआती जांच में इस कॉल सेंटर के माध्यम से विदेशी नागरिकों को कथित तौर पर झांसा देकर साइबर ठगी किए जाने की आशंका जताई गई है।

यह कार्रवाई एडीसीपी क्राइम किरण यादव के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच और शहर के कई थानों की संयुक्त पुलिस टीम ने की। पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, सर्वर, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इन उपकरणों को कब्जे में लेकर उनकी फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार समिट बिल्डिंग में लंबे समय से संचालित एक कॉल सेंटर की गतिविधियों को लेकर इनपुट मिलने के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात परिसर में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों से पूछताछ की गई तथा 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर उनकी भूमिका की जांच शुरू की गई।

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प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि कॉल सेंटर के माध्यम से विदेशों के नागरिकों को विभिन्न तरीकों से संपर्क कर कथित साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था। हालांकि पुलिस ने अभी तक ठगी की कुल रकम या प्रभावित लोगों की संख्या के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है। मामले की जांच जारी है।

छापेमारी के दौरान बरामद कंप्यूटर सिस्टम, लैपटॉप, सर्वर, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन पुलिस जांच का प्रमुख आधार बने हैं। जांच एजेंसियां इन उपकरणों से डेटा रिकवर कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित नेटवर्क किस प्रकार संचालित किया जा रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका हो सकती है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से ईमेल रिकॉर्ड, कॉल लॉग, आईपी एड्रेस, सॉफ्टवेयर, सर्वर एक्सेस और अन्य डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने इस मामले में कथित नेटवर्क के विदेशी संपर्कों की भी जांच शुरू कर दी है। साथ ही बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और हवाला के माध्यम से हुए संभावित वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित ठगी से जुड़े धन का प्रवाह किन माध्यमों से हुआ और इसमें अन्य राज्यों या देशों के लोगों की कोई भूमिका है या नहीं।

फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि बरामद डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लखनऊ पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई को लेकर जल्द विस्तृत प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी। इसमें बरामद साक्ष्यों, हिरासत में लिए गए लोगों और जांच की प्रगति से जुड़ी आधिकारिक जानकारी साझा की जा सकती है।

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