>कभी अपनी भव्यता और चमक के लिए मशहूर सहारा शहर अब सरकारी शिकंजे में आ गया है। लखनऊ नगर निगम ने सोमवार को गोमतीनगर स्थित सहारा शहर को लीज़ नियमों के उल्लंघन के चलते सील कर दिया। जिस जगह कभी ग्लैमर और रौनक का मेला लगता था, वहां आज प्रशासन की मुहर और पुलिस की मौजूदगी थी।
>लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने जानकारी दी कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि सहारा इंडिया ने 1994 में हुई 30 साल की लीज़ की शर्तों का पालन नहीं किया। “लीज़ 2024 में खत्म हो गई, इसके बावजूद न तो सहारा ने आवास निर्माण शुरू किया, न ही निर्धारित परियोजनाओं पर कोई कार्य किया,” मेयर ने कहा। नगर निगम की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सहारा शहर को सील किया। कार्रवाई के दौरान निगम अधिकारियों ने कहा कि यह कदम लंबे समय से चल रहे लीज़ विवाद और SEBI के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के बाद उठाया गया है।
>नगर निगम की कार्रवाई के तुरंत बाद सहारा इंडिया ग्रुप ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी का कहना है कि उसे अपने पक्ष में सफाई देने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। कंपनी के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी है कि यह संपत्ति अब भी विवादित है और निगम की कार्रवाई जल्दबाज़ी में की गई है।
>यह मामला केवल लीज़ तक सीमित नहीं है। सहारा इंडिया पहले से ही SEBI के साथ निवेशकों के पैसों को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद में उलझा हुआ है। SEBI ने भी यह साफ़ किया था कि सहारा को किसी भी नई परियोजना के लिए पूर्व अनुमति लेनी होगी, लेकिन लीज़ की शर्तों में उल्लंघन पाए जाने पर नगर निगम ने सीधा एक्शन लिया।
>साल 1994 में सहारा इंडिया ने गोमतीनगर में लगभग 170 एकड़ भूमि पर “सहारा शहर” प्रोजेक्ट की नींव रखी थी। इसका उद्देश्य आवासीय और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स विकसित करना था, लेकिन तीन दशक बीत जाने के बाद भी वादे अधूरे रहे। नगर निगम का कहना है कि सहारा को दी गई जमीन सार्वजनिक विकास उद्देश्यों के लिए थी, न कि केवल निजी नियंत्रण के लिए।
>सूत्रों के अनुसार, लीज़ के नवीनीकरण या पुनःआवंटन पर कोई निर्णय कोर्ट के निर्देश के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल, सहारा शहर परिसर पर सील लग चुकी है और प्रशासन ने वहां कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए हैं।
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