>आठ वर्षीय मासूम से दरिंदगी करने वाले आरोपी को आखिरकार कड़ी सजा मिल गई है। पॉक्सो (POCSO) एक्ट के विशेष न्यायाधीश ने आरोपी विनोद कुमार पासी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए दिया जाएगा। यह फैसला न केवल न्याय की जीत है, बल्कि समाज के लिए एक सख्त संदेश भी है कि मासूमों के साथ हैवानियत करने वालों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
>यह दर्दनाक घटना 19 सितंबर 2022 की है, जब पीड़िता की मां ने थाना गुड़ंबा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि वह टेढ़ी पुलिया स्थित मर्सी अस्पताल में काम करती है, जबकि उसका पति राजगीरी का काम करता है। दिसंबर 2022 की एक शाम, जब दोनों पति-पत्नी अपने काम पर गए हुए थे, तो पड़ोसी विनोद कुमार पासी ने मौका पाकर बच्ची को कार्टून दिखाने के बहाने अपने कमरे में बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी ने बच्ची को जान से मारने की धमकी भी दी, जिससे वह बुरी तरह डर गई और कुछ समय तक कुछ बता नहीं सकी।
>घटना के कुछ समय बाद बच्ची की हालत खराब होने लगी। तब मां को शक हुआ और जब उसने बच्ची से पूछा तो सारा मामला सामने आया। बच्ची को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज शुरू हुआ। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने पर पुलिस ने आरोपी विनोद को गिरफ्तार कर लिया।
>पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश ने सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया। अदालत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज को झकझोर देने वाली हैं और मासूम बच्चों की सुरक्षा के लिए कठोर सजा ही उचित संदेश दे सकती है। अदालत ने आरोपी को 20 साल की सजा के साथ 55 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि नियमानुसार पीड़िता के पुनर्विकास और मानसिक पुनर्वास में दी जाएगी।
>पुलिस ने मामले की जांच को गंभीरता से लेते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। वहीं, न्यायालय ने इस मामले में त्वरित सुनवाई कर सजा सुनाई। समाजसेवी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय समाज में बढ़ते दुष्कर्म के मामलों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
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