नेपाल से नज़दीकी, दिल्ली तक रफ्तार: गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे ने खोले विकास के द्वार

News Desk 20 Jun 2025, 03:48 AM 1 min read
नेपाल से नज़दीकी, दिल्ली तक रफ्तार: गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे ने खोले विकास के द्वार


>उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में विकास की नई तस्वीर उकेरते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। यह न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि नेपाल के साथ भारत के संबंधों को भी नया आयाम देगा।


>गोरखपुर से आजमगढ़ तक फैले इस 91 किलोमीटर लंबे फोर-लेन एक्सप्रेसवे ने सामरिक, आर्थिक, पर्यटन और मानव सेवा के स्तर पर अनेक संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। यह एक्सप्रेसवे अब नेपाल सीमा से मात्र 100 किलोमीटर की दूरी पर है और वाया पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए दिल्ली तक तेज और सुगम यात्रा को संभव बनाता है।


>नेपाल से रिश्तों की डोर होगी और मजबूत


>गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे नेपाल से जुड़े सोनौली बॉर्डर को जोड़ता है, जिससे नेपाल आने-जाने वाले यात्रियों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। नेपाल के लुंबिनी, पोखरा और काठमांडू जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों से आने वाले लोगों को अब यूपी की राजधानी लखनऊ और वहां से दिल्ली, आगरा जैसे शहरों तक आसान और सुरक्षित पहुंच मिलेगी।

मरीजों के लिए जीवन रेखा


>नेपाल से बड़ी संख्या में लोग भारत के अस्पतालों में इलाज के लिए आते हैं। अब यह एक्सप्रेसवे मरीजों और उनके परिजनों के लिए समय की बचत और बेहतर सुविधा का जरिया बनेगा। गोरखपुर से लखनऊ तक की यात्रा अब केवल साढ़े तीन घंटे में पूरी की जा सकेगी।

सामरिक शक्ति को देगा नया बल


>भारत-नेपाल सीमा के समीप स्थित यह एक्सप्रेसवे सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत अहम है। आपातकाल में सेना और राहत बलों की तेज़ तैनाती में यह मार्ग निर्णायक भूमिका निभाएगा। भारत-नेपाल के बीच व्यापारिक आवाजाही में भी यह मार्ग सहायक सिद्ध होगा।

एक्सप्रेसवे प्रदेश’ की ओर उत्तर प्रदेश


>योगी सरकार की मंशा उत्तर प्रदेश को देश का इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की है, और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे उसी दिशा में बड़ा कदम है। यह एक्सप्रेसवे राज्य का सातवां संचालित एक्सप्रेसवे बन गया है, जो पूर्वांचल में औद्योगिक निवेश, स्थानीय रोजगार, कृषि उत्पादों की ढुलाई और किसानों की आय में वृद्धि का माध्यम बनेगा।


>यह मार्ग केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करेगा और पड़ोसी देश के साथ सहयोग की एक नई इबारत लिखेगा।

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