नई दिल्ली, 5 सितंबर। दिल्ली में निर्वाचन आयोग की विशेष सघन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बेघर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि बिना पते वाले मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए पहले से ही व्यवस्था मौजूद है और मौजूदा प्रक्रिया में किसी कमी की बात सामने नहीं आती।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता इंदु प्रकाश सिंह की ओर से जताई गई आशंका बेबुनियाद प्रतीत होती है। पीठ ने यह भी कहा कि दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के कारण विस्थापित हुए लोगों के मतदाता सूची से बाहर होने के संबंध में याचिका में बिना साक्ष्य के दावे किए गए हैं।
जनहित याचिका में एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी होने वाली मतदाता सूची से बेघर लोगों के नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से दिल्ली में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के कारण विस्थापित हुए लोगों के मतदाता सूची से प्रभावित होने की बात कही गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने इन आशंकाओं को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि बिना पते वाले मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। इसी आधार पर पीठ ने माना कि याचिका में की गई मांगों को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था के तहत बेघर मतदाताओं को ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया लागू है। इसलिए केवल इस आशंका के आधार पर कि एसआईआर के दौरान बेघर लोगों के नाम हटाए जा सकते हैं, याचिका में मांगी गई राहत देने का आधार नहीं बनता। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने ड्राफ्ट मतदाता सूची का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बेघर लोगों की अलग श्रेणी मौजूद है। इसमें संबंधित मतदाताओं के नाम, उम्र, जेंडर और फोटो जैसी जानकारी दर्ज की गई है।
अदालत के मुताबिक इन मतदाताओं के मामले में घर का नंबर ‘शून्य’ दिखाया गया है। इसका मतलब यह है कि किसी व्यक्ति के पास सामान्य अर्थों में दर्ज करने योग्य घर का नंबर नहीं होने के बावजूद उसे मतदाता सूची में शामिल करने के लिए व्यवस्था मौजूद है। पीठ ने इसे इस बात का संकेत माना कि निर्वाचन आयोग एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बेघर लोगों को ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया पहले से लागू कर रहा है।
अदालत ने कहा कि बिना पते वाले मतदाताओं को शामिल करने के लिए पहले से व्यवस्था मौजूद है। पीठ के अनुसार एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मैनुअल में बताए गए तरीके के अनुरूप बेघर लोगों को ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। इस व्यवस्था में बेघर मतदाताओं की पहचान से जुड़ी जानकारी सूची में दर्ज की जाती है। ड्राफ्ट सूची में उनके नाम, उम्र, जेंडर और फोटो उपलब्ध होने के साथ घर के नंबर के स्थान पर ‘शून्य’ दिखाया गया है।
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इस तरह अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में दर्ज होने के लिए किसी व्यक्ति के पास सामान्य घर का नंबर होना ही एकमात्र आधार नहीं है। बेघर मतदाताओं के लिए अलग प्रक्रिया के तहत उनकी जानकारी दर्ज किए जाने की व्यवस्था मौजूद है। मामले में दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि ऐसी कार्रवाई के कारण विस्थापित हुए लोगों के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं।
इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने ऐसे दावे बिना साक्ष्य के किए हैं। पीठ ने इन दावों को याचिका में मांगी गई राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि यदि ध्वस्तीकरण या किसी अन्य स्थान पर बसाए जाने के कारण किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची से हट जाता है, तो उसके लिए नियमों के तहत दोबारा पंजीकरण की व्यवस्था उपलब्ध है।
हाई कोर्ट ने यह भी बताया कि यदि किसी मतदाता का नाम ध्वस्तीकरण या दूसरी जगह बसाए जाने की वजह से मतदाता सूची से हट जाता है, तो वह रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स के तहत जारी फार्म-छह भरने का हकदार है। अदालत की टिप्पणी के मुताबिक यह व्यवस्था ऐसे व्यक्ति को दोबारा मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए आवेदन करने का रास्ता उपलब्ध कराती है। यानी मतदाता सूची में नाम नहीं रहने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के लिए नियमों के तहत आवेदन करने का विकल्प मौजूद है।
फार्म-छह का उल्लेख करते हुए अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम से जुड़ी समस्या की स्थिति में संबंधित नियमों के तहत पंजीकरण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। विशेष सघन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसमें दर्ज मतदाताओं से जुड़ी जानकारी की प्रक्रिया से संबंधित है। इसी प्रक्रिया के बीच दिल्ली में बेघर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटने की आशंका को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी।
याचिका में विशेष रूप से उन लोगों की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी, जो स्थायी घर या दर्ज पता नहीं होने के कारण सामान्य मतदाता पहचान प्रक्रिया में कठिनाई का सामना कर सकते हैं। हालांकि, हाई कोर्ट ने उपलब्ध व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना पते वाले मतदाताओं को शामिल करने के लिए प्रक्रिया पहले से मौजूद है। ड्राफ्ट मतदाता सूची में बेघर लोगों की श्रेणी और उनकी जानकारी दर्ज होने का उल्लेख भी अदालत के सामने किया गया।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की आशंका बेबुनियाद लगती है और मौजूदा व्यवस्था में कोई कमी नहीं है। अदालत ने इस आधार पर याचिका में की गई मांगों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि याचिका में की गई कोई भी मांग मंजूर करने लायक नहीं है और इसे खारिज किया जाता है। इस फैसले के साथ अदालत ने बेघर मतदाताओं के लिए मौजूद व्यवस्था और मतदाता सूची से नाम हटने की स्थिति में उपलब्ध प्रक्रिया, दोनों का उल्लेख किया।
हाई कोर्ट की टिप्पणी में ड्राफ्ट मतदाता सूची में घर के नंबर के स्थान पर ‘शून्य’ दर्ज होने का विशेष उल्लेख है। अदालत के अनुसार बेघर मतदाताओं के नाम, उम्र, जेंडर और फोटो के साथ यह विवरण ड्राफ्ट सूची में मौजूद है। यह व्यवस्था उन मतदाताओं की स्थिति को अलग तरीके से दर्ज करती है जिनके पास सूची में दर्ज करने के लिए सामान्य घर का नंबर उपलब्ध नहीं है। अदालत ने इसी उदाहरण के आधार पर कहा कि एसआईआर के दौरान बेघर लोगों को ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया लागू है।
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