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Chamoli Helicopter Crash: चमोली हेलीकॉप्टर हादसे पर उठे सवाल, ऑरेंज अलर्ट के बावजूद कैसे मिली उड़ान की अनुमति?

Chamoli Helicopter Crash: चमोली जिले में बदरीनाथ धाम से श्रद्धालुओं को लेकर देहरादून लौट रहा एक हेलीकॉप्टर शुक्रवार दोपहर दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया। जोशीमठ के पास चाई-थैंग गांव के नजदीक पहाड़ी से टकराने के बाद हेलीकॉप्टर में आग लग गई।
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Bureau News Desk
31 Oct 2026
01:31 PM
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Chamoli Helicopter Crash: चमोली हेलीकॉप्टर हादसे पर उठे सवाल, ऑरेंज अलर्ट के बावजूद कैसे मिली उड़ान की अनुमति?
सोर्स-फाइल फोटो
हाइलाइट्स
चमोली हेलीकॉप्टर हादसे पर उठे गंभीर सवाल
ऑरेंज अलर्ट के बावजूद कैसे मिली उड़ान भरने की अनुमति?
UCADA का दावा- उड़ान के समय मौसम था साफ
जोशीमठ घाटी में अचानक बदले मौसम से टूटा संपर्क

Chamoli Helicopter Crash: उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ धाम से श्रद्धालुओं को लेकर देहरादून लौट रहा एक हेलीकॉप्टर शुक्रवार दोपहर दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया। जोशीमठ के पास चाई-थैंग गांव के नजदीक पहाड़ी से टकराने के बाद हेलीकॉप्टर में आग लग गई। हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दुर्घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा और खराब मौसम के बीच उड़ानों के संचालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस हादसे के बाद सबसे बड़ा यह उठ रहा है कि जब  मौसम विभाग ने चमोली जिले के लिए पहले ही ऑरेंज अलर्ट जारी किया था और  मौसम विभाग ने क्षेत्र में ओलावृष्टि, आकाशीय बिजली और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी थी। साथ ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से भी अलर्ट जारी किया गया था तो फिर  इसके बावजूद हेलीकॉप्टर ने बदरीनाथ से उड़ान कैसे भरी।

हादसे के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) की ओर से सफाई सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक हेलीकॉप्टर VT-HCX ने दोपहर करीब 1:12 से 1:14 बजे के बीच बदरीनाथ से उड़ान भरी थी। उस समय उड़ान क्षेत्र में मौसम साफ था। विभाग का कहना है कि बदरीनाथ से आगे बढ़ने के बाद जोशीमठ घाटी में अचानक मौसम बदल गया और घने बादल छा गए। बताया गया कि उड़ान भरने के करीब 15 मिनट बाद हेलीकॉप्टर का कंट्रोल रूम और ट्रैकिंग सिस्टम से संपर्क टूट गया। हालांकि, स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बदरीनाथ में सुबह से ही मौसम खराब था। दोपहर में कुछ समय के लिए बादल छंटे थे, जिसके बाद हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी।

ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर शुक्रवार दोपहर बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट के लिए रवाना हुआ था। रास्ते में जोशीमठ के पास चाई-थैंग गांव की पहाड़ी से हेलीकॉप्टर टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि उसमें विस्फोट हुआ और देखते ही देखते आग लग गई। भारतीय सेना की ओर से हादसे की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस-प्रशासन की टीमों ने दुर्घटनास्थल का पता लगाने के लिए कार्रवाई शुरू की।

घटनास्थल घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी इलाके में होने के कारण राहत एवं बचाव दल को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ज्योतिर्मठ के एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ के मुताबिक, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और पुलिस की संयुक्त टीम पैदल रास्ते से घटनास्थल तक पहुंची। इसके बाद सभी छह शवों को बाहर निकाला गया। हादसे में कुछ शव बुरी तरह झुलस गए थे। शवों को शनिवार को ज्योतिर्मठ लाए जाने की जानकारी दी गई। इस हादसे में जान गंवाने वाले पांचों यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे। इनमें बेंगलुरु के सीसीबी में तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर भी शामिल थे। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान इस प्रकार हुई है।

कैप्टन हिमांशु (48 वर्ष): हेलीकॉप्टर के पायलट।
अरुण सालुंके (44 वर्ष): बेंगलुरु के सीसीबी इंस्पेक्टर। वह 2007 बैच के पुलिस अधिकारी थे और मूल रूप से बेलगाम के अराटाला गांव के निवासी थे।
के. सुधीर (50 वर्ष): कर्नाटक के रहने वाले अधिवक्ता।
शंकर गौड़ा (39 वर्ष): हुलियुरदुर्गा, कुनिगल तालुक, तुमकुर के निवासी।
एच.एस. नटराज (51 वर्ष): हुलियुरदुर्गा, कुनिगल तालुक, तुमकुर के निवासी।
प्रताप गौड़ा (41 वर्ष): बाछल्ली गांव, सकलेशपुर, हासन के निवासी और बेंगलुरु में व्यवसायी।

बदरीनाथ धाम की यात्रा पर निकले इन पांच श्रद्धालुओं के परिवारों को उम्मीद थी कि दर्शन करने के बाद वे सुरक्षित अपने घर लौटेंगे। लेकिन शुक्रवार दोपहर एक हादसे ने परिवारों की खुशियां छीन लीं। जिन यात्रियों ने कुछ समय पहले भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए थे, उनकी यात्रा देहरादून पहुंचने से पहले ही हमेशा के लिए थम गई। हादसे में बेंगलुरु के पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके की मौत से उनके विभाग और परिचितों में भी शोक की लहर है। वहीं, अन्य मृतकों के परिवारों पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। धार्मिक यात्रा से लौट रहे पांच श्रद्धालुओं और उन्हें सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे पायलट की एक साथ मौत ने पूरे हादसे को और भी दर्दनाक बना दिया है। 

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