>उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्थित प्रतिष्ठित भातखंडे संगीत अभिमत विश्वविद्यालय एक बड़े वित्तीय घोटाले की गिरफ्त में आ चुका है। कुल 3.31 करोड़ रुपये की अनियमितता के मामले में सीआईडी ने तगड़ी कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनमें विश्वविद्यालय के दो कर्मचारी और पांच निजी फर्मों के संचालक शामिल हैं।
>सीआईडी की जांच रिपोर्ट ने इस पूरे मामले की परतें खोल दी हैं। बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के कार्य आवंटन, फर्जी बिलिंग और फर्मों से सांठगांठ जैसे गंभीर आरोप जांच में प्रमाणित हुए हैं।
>गिरफ्तार किए गए विश्वविद्यालय कर्मियों में आहरण-वितरण अधिकारी ज्ञानेंद्र दत्त वाजपेयी और समिति सदस्य मनोज कुमार मिश्रा शामिल हैं। वहीं फर्म संचालकों में मु. शोएब, कुंदन सिंह, सुरेश सिंह, विनोद कुमार मिश्रा और जुगल किशोर वर्मा के नाम सामने आए हैं। सभी को कैसरबाग कोतवाली में दर्ज मुकदमे के आधार पर गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है।
>इस घोटाले की जड़ें साल 2021 तक जाती हैं। जब राज्यपाल के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने भातखंडे विश्वविद्यालय में आर्थिक अनियमितता की पुष्टि की थी। इसके बाद 5 मार्च 2021 को मुकदमा दर्ज हुआ और पूरे मामले की सीआईडी को जांच सौंपी गई।
>जांच में यह बात सामने आई कि तत्कालीन कुलपति प्रो. श्रुति संडोलीकर, विश्वविद्यालय के छह अन्य कर्मचारी और कुल 11 फर्मों के संचालक इस घोटाले में सीधे तौर पर शामिल थे।
>सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, बिना टेंडर कार्य देने में शामिल फर्मों के नाम भी सामने आ चुके हैं—जैसे अंजली ट्रेडर्स, पुण्य इंटरप्राइजेज, ऊषा एसोसिएट्स, इंडियन फायर सर्विस इंटरप्राइजेज, सांई कृपा ट्रेडिंग, एपेक्स कूलिंग सर्विस, और कई अन्य।
>इस घोटाले ने न केवल एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान की साख को गहरी चोट पहुंचाई है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि शैक्षणिक संस्थानों में निगरानी और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जाए।
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