>बाराबंकी | लखनऊ-अयोध्या नेशनल हाईवे पर रविवार रात एक 21 वर्षीय युवती के साथ हुए दुष्कर्म प्रयास ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। साहस का परिचय देते हुए युवती ने ऑटो से कूदकर अपनी जान बचाई और राहगीरों की मदद से पुलिस तक मामला पहुंचा। घटना के बाद हाईवे और रेलवे स्टेशन दोनों जगह सुरक्षा इंतज़ाम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
>पीड़िता कुशीनगर जिले के तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र की रहने वाली है और लखनऊ के तिवारीगंज में अपनी सहेली संग रहकर निजी नौकरी करती है। 24 अगस्त की रात लगभग 9 बजे वह वैशाली एक्सप्रेस से बाराबंकी रेलवे स्टेशन उतरी। यहीं से एक ऑटो चालक ने उसे तिवारीगंज तक छोड़ने का भरोसा दिलाया। ऑटो में पहले से बैठे दो युवकों को पीड़िता ने साधारण सवारी समझ लिया।
>करीब 9:30 बजे जैसे ही ऑटो सफेदाबाद ओवरब्रिज पर पहुंचा, चालक ने अचानक वाहन रोक दिया। दोनों युवक बाहर निकलकर ऑटो के आगे-पीछे खड़े हो गए और चालक ने पर्दा गिराकर युवती से छेड़छाड़ शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से घबराई युवती ने हिम्मत दिखाई और चलती ऑटो से कूदकर हाईवे पर दौड़ पड़ी। उसी वक्त एक राहगीर ने उसकी हालत देखकर 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी।
>हालांकि आरोपी ऑटो लेकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने पीड़िता को कोतवाली लाकर पूछताछ की लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मामला करीब 17 घंटे तक दबाए रखा गया। अंततः सोमवार दोपहर 2:39 बजे एफआईआर दर्ज की गई।
>सीओ सिटी हर्षित चौहान ने बताया कि रेलवे स्टेशन से सफेदाबाद तक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। डीएम बंगले के पास लगे कैमरे में संदिग्ध ऑटो दिखाई दिया। तकनीकी साक्ष्यों और जांच के आधार पर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि इस जघन्य वारदात का पर्दाफाश जल्द कर दिया जाएगा।
>यह घटना न केवल पीड़िता के साहस की मिसाल है बल्कि प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। स्टेशन और हाईवे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपराधियों का इस तरह सक्रिय होना व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर सुरक्षा मानकों को कितना मजबूत करता है।
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