>सावन के पहले सोमवार को अवसानेश्वर महादेव मंदिर में हुई बिजली हादसे की त्रासदी ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। हादसे में जहां दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 38 अन्य घायल हो गए, वहीं इस पीड़ा के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति डगमगाई नहीं।
>सुबह भोर में हुए हादसे के बावजूद हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते रहे और भोलेनाथ के शिवलिंग पर जलाभिषेक करते नजर आए। धार्मिक विश्वास की यह जीवंत मिसाल भारत की सांस्कृतिक ताकत और संकल्प का प्रतीक बन गई।
>सोमवार सुबह, मंदिर परिसर में जलाभिषेक के दौरान बिजली का तार टूटकर टीन शेड पर गिर पड़ा, जिससे पूरे परिसर में करंट फैल गया। करंट की चपेट में आने से मोके पर अफरा-तफरी मच गई।
>इस हादसे में मुबारकपुरा (लोनीकटरा) निवासी प्रशांत (22) और एक अन्य श्रद्धालु की मौत हो गई, जबकि 38 लोग झुलस गए या गिरने से घायल हो गए। त्रिवेदीगंज सीएचसी में 10 घायलों को भर्ती कराया गया, जिसमें से 5 की हालत गंभीर होने पर उन्हें रेफर किया गया। हैदरगढ़ सीएचसी में 26 अन्य श्रद्धालुओं का इलाज जारी है।
श्रद्धालु बोले – “होनी को कौन टाल सकता है!”
>रायबरेली के बछरावां से आए श्रद्धालु बालकृष्ण पांडेय ने कहा, “भोलेनाथ की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। हादसा दुखद है, पर हमारे विश्वास को तोड़ने वाला नहीं। हम जलाभिषेक करते रहेंगे।”
>अमेठी के रामपुर कुकहा की रीतू और रायबरेली के अर्जुन सहित कई घायल आसपास के जिलों से आए श्रद्धालु हैं, जो सावन सोमवार के पावन अवसर पर बाबा के दर्शन के लिए आए थे।
>घटना की जानकारी मिलते ही डीएम शशांक त्रिपाठी और एसपी अर्पित विजय वर्गीय स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायलों का हाल जाना और प्रशासनिक टीम को राहत कार्य में जुटाया।
>मंदिर प्रशासन और वालंटियरों की सक्रियता ने हादसे के तुरंत बाद श्रद्धालुओं को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भीड़ में हड़कंप के बावजूद हालात तेजी से सामान्य किए गए।
>सावन सोमवार को अवसानेश्वर महादेव मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी से पुष्प वर्षा कार्यक्रम प्रस्तावित था, जिसके चलते भोर से ही हजारों श्रद्धालु मंदिर में एकत्रित हो गए थे।
>विधायक दिनेश रावत की पहल पर यह आयोजन प्रस्तावित हुआ था, और इसी कारण श्रद्धालु रात 12 बजे से ही कतार में खड़े थे। भक्ति और विश्वास के इस दृश्य ने हर आंख को श्रद्धा से भर दिया।
>यह मंदिर चार जिलों - लखनऊ, रायबरेली, अमेठी और सुलतानपुर की सीमाओं से सटा हुआ है, जिससे यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के शिवलिंग पर मुगलकाल में तोड़फोड़ का प्रयास भी किया गया था, जिसके निशान आज भी मौजूद हैं — यह स्वयं में मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है।
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